Wednesday, August 18, 2010


बेवफ़ाई का बुरा ये हाल होता है,
आँखें हँसती है मगर दिल रोता है,
मानते है जिसे हम मंज़िल अपनी,
हमसफ़र उसका कोई और होता है !

40 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत उम्दा शेर प्रस्तुत किया है!
--
ईश्वर न करे किसी के साथ ऐसा हो!

मनोज कुमार said...

गहरी संवेदना।

विनोद कुमार पांडेय said...

सुंदर शेर....धन्यवाद

nivedita said...

आखरी लाइन तो बहुत बढ़िया है.


मंजिल जितना करीब दिखता है,
हमसफ़र लेकिन उतना ही दूर चला जाता है!

kshama said...

Khuda na kare,aisa kisee ke saath ho!

Akhtar Khan Akela said...

bbli bhn aapne bevfaayi or uske ntije ko chnd afaazon men jo pribhaashit krne ka kmaal kiya he voh sirf aap hi kr skti hen bdhaayi ho. akhtar khan akela kota rajsthan

Kiran Bajaj Sawhney said...

Nice

MUFLIS said...

वाह
हमेशा की तरह
खूबसूरत लफ्ज़ ...
खूबसूरत शायरी ...
खूबसूरत अंदाज़ .....

राजकुमार सोनी said...

बबली जी
आप भले ही छोटी रचना लिखती है लेकिन प्रभावी रचना लिखती है.
आपको बधाई

Ashish (Ashu) said...

Vaah ji vaah...last ki line dil ko chu gai.....bilkul sahi kaha aapne "jise mante hai hamsaphar apna. manjil uska koi our hota hai....."

BK Chowla, said...

I wish I could express my comments in Hindi

वन्दना said...

बडी गहरी बात कह दी………………उम्दा भाव्।

anjana said...

उम्दा शेर |

hem pandey said...

यह तो बेवफाई सहने वाले की दास्ताँ है. हालात बेवफा को बावफा भी बना देते हैं.

P S Bhakuni (Paanu) said...

मानते है जिसे हम मंज़िल अपनी,
हमसफ़र उसका कोई और होता है !
प्रभावी रचना ..........

chitra said...

Beautifully expressed. Bewafayi, dangerous word.

Udan Tashtari said...

बहुत बढ़िया.

अरुणेश मिश्र said...

बबली जी .
ऐसा भी होता है . यही प्रेम की विसंगति है ।
प्रशंसनीय ।

sheetal said...

bahut sundar likha aapne

Life Unleashed said...

beautiful shayri must say

पंकज मिश्रा said...

मंजिल जितना करीब दिखता है,
हमसफ़र लेकिन उतना ही दूर चला जाता है!
उम्दा रचना

kavita said...

Very beautiful and touching.Thanks a lot for sharing this Babli.

रचना दीक्षित said...

वाह!!! वाह!!!! वाह!!1


वाह

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

चाय के पियाली में तूफ़ान!!अब इसका माने चाहे जो हो!!मगर तुमरा कबिता होता ऐसने है...बहुत सुंदर!!

lokendra singh rajput said...

kya baat hai.......?

अजय कुमार said...

आप अक्सर दुखती रग----

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा शेर |

sada said...

बहुत ही गहरे भाव लिये सुन्‍दर शब्‍द रचना ।

Sumandebray said...

bahut khub....

बेचैन आत्मा said...

..सही है.
..हीर का ब्लॉग और इमरोज याद आ गए.

सुधीर said...

vah, bahut khoob

Pawan Rana said...

bhut khoob... kya likha h..bhut khob very nice post

Akanksha~आकांक्षा said...

खूबसूरत शेर....उम्दा प्रस्तुति !!

मनोज भारती said...

बेवफाई ...मंजिल...हमसफर

दिल रो रहा ...आँखें हँस रही

उम्दा शे`र !!!

ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι said...

मानते हैं जिसे हम मंज़िल अपनी,हमसफ़र उसका कोई और होता है। बेहतरीन शे"र।

महफूज़ अली said...

रक्षाबंधन की बधाई और शुभकामनाए...

arvind said...

मानते है जिसे हम मंज़िल अपनी,
हमसफ़र उसका कोई और होता है !
...बहुत उम्दा शेर

kshama said...

Babli,Rakshabandhan mubarak ho!
Tumhari nayi post kee ittela to mil rahi hai,lekin post avtarit nahi hui hai!

राणा प्रताप सिंह (Rana Pratap Singh) said...

रक्षाबंधन के पावन पर्व की ढेरों शुभकामनाएं

http://rp-sara.blogspot.com/2010/08/blog-post_23.html#comment-form

Divya said...

खूबसूरत शायरी .