Wednesday, March 25, 2009


दिल की आवाज़ को इज़हार कहते हैं,
झुकी निगाह को इकरार कहते हैं,
सिर्फ़ पाने का नाम इश्क नहीं,
कुछ खोने को भी प्यार कहते हैं!

2 comments:

parijayi said...

dil ko lubhane ke liye
dard ki bhi zarurat hai
masallah! apki shayeri
ap se bhi khubsurat hai

Dr. shyam gupta said...

चकोर !
तू क्यों निहारता है,चांद की ओर,
वह अप्राप्य है ,दूर है;-फ़िर भी -
क्यों साधे है ,मन की डोर?

प्रीति में है बदी गहराई ,
प्रियतम की आस जब ,
मन में समाई ;
दूर हो या पास ,
मन लेता है अन्गडाई ।

मिलकर तो सभी प्यार कर लेते हैं,
जो दूर से रूप रस पीते हैं,
वही तो अमर प्रेम जीते हैं।