Tuesday, April 7, 2009


इस कदर हमारी चाहत का इम्तीहान मत लीजिये,
क्यूँ हो खफा ये बयान तो कीजिये...
कर दीजिये माफ़ अगर हो गई कोई खता,
यूँ ही याद करके सज़ा तो दीजिये...!!!

3 comments:

sujata said...

wah wah!! chah kar bhool jaana sabse badi sazaa hain..

Amit K Sagar said...

Nice Written.
keep it up.
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मोहतरमा,
आप मेरे एक ही ब्लॉग की इक ही पोस्ट पर हर बार कमेन्ट कर रही हैं. कृपया मेरे अन्य ब्लॉग [मौजे-सागर]
[उल्टा तीर पत्रिका] [उल्टा तीर] पर अपनी अमूल्य राय दें. मुझे खुशी होगी.
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शुभकामनाओं सहित;
[अमित के सागर]
http://mauj-e-sagar.blogspot.com
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http://ut-patrika.blogspot.com

रचना गौड़ ’भारती’ said...

pyaar ki gahrai dekh kar aaccha laga.aap umda kalaakar hai meri badhai sweekaren.