Thursday, April 23, 2009

मिटटी से हवा आने लगी अभी अभी,
क्या आपने याद किया अभी अभी?
आपसे कब मिलेंगे पता नहीं,
फिर भी यूँ लगता है आप मिलकर गए अभी अभी !

20 comments:

manu said...

एक दम सधे हाथों से बना शानदार स्केच,,,खूबसूरत ख्याल के साथ ..
बहुत पसंद आया,,,,

waaaaaaahhhhhhhh!!!!!!

ajay kumar jha said...

jab bhee koi khyaal aataa hai, tabhee tabhee,
un khyaalon ke beech aa jaate ho, tum bhee, kabhee kabhee,

yun hee aate rahein....
bahut sundar....

नीरज कुमार said...

Ma,m
आपसे कब मिलेंगे पता नहीं,
फिर भी यूँ लगता है आप मिलकर गए अभी अभी !

A very real emotion.
Were these sketches drawn by you...
So beautiful!

archana said...

babli ji...
aapke guldaste ke kuch phoolo se mili ....her phool ki ek alag ada ,alag khoosboo aur ek alag ahesaas jaise ....jindagi ki kitni galiya ek jagah aaker mili ho...

bahut khoobsorat

sujata said...

beautiful thought!! loved it Urmi..great going

महामंत्री - तस्लीम said...

बहुत खूब। आपकी रचनाओं में शब्दों की लडियाँ आमसान से गिरती बर्फ की तरह हौले हौले हृदय में उतर जाती हैं।

----------
TSALIIM.
-SBAI-

मोहन वशिष्‍ठ said...

आपका जवाब नहीं लाजवाव हो उर्मी जी क्‍या पेंटिंग करते हो और शब्‍दों को तो बेहतरीन

Anonymous said...

मिलने बिछड़्ने की बाते वो करे ,
जो दूर हो एक दुजे से.
हम ने दिल मे सजा रखी है,
तस्वीरे यार की ..........

mark rai said...

आपसे कब मिलेंगे पता नहीं,
फिर भी यूँ लगता है आप मिलकर गए अभी अभी....................aisa hi lagata hai......is chhoti si jindagi me jab koi apna/paraya milta hai ...

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

अभी-अभी रचना पढी, मन को भायी खूब.
चित्र रुचा मुझको बहुत, गया भाव में डूब.

"अर्श" said...

jab sanjeev jee ne khud badaaee kari hai to meri kya majaal kuchh kahne ki bahot khub...


arsh

''अम्बरीष मिश्रा '' said...

"सच बोल कि काला कौवा काट खायेगा"

very good and nice blog this is but when I comment on this blog sayab kuch kaas hoga tabhi ye yehsaas hoga
yaha par blog padta hi nahee koi
aur cament dena kya majak hoga

aap ko main manch par amntrat karta hun ki aaye aur pahlee mahila bane aur blog manch ko raunak kare

aap ko lekhan amntaran bheja ja chuka hai


jate jaate
सच बोल कि काला कौवा काट खायेगा

''अम्बरीष मिश्रा '' said...

मै जान सकता हऊ कि बब्ली या उर्मी

और ब्लोग पर F M wah bhai wah

अभिन्न said...

हमने याद किया तो मिटटी ने पैगाम दिया उनको
वो बहके तो मेरी यादों ने जाकर थाम लिया उनको

anilbigopur said...

Woh nadiyan nahi aansu they mere, jinpar woh kashti chalate rahe.
Manzil mile unhein yeh chahat thi meri, isliye hum aansu bahate rahe.

jamos jhalla said...

YEH PREM KHUSBOO ,
BADTEE JAATEEHAI |
JAB NAHIN HOTAA,
APNAA PREM RUBROO||

anilbigopur said...

कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

एक दोस्त है कच्चा पक्का सा ,
एक झूठ है आधा सच्चा सा .
जज़्बात को ढके एक पर्दा बस ,
एक बहाना है अच्छा अच्छा सा .

जीवन का एक ऐसा साथी है ,
जो दूर हो के पास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

हवा का एक सुहाना झोंका है ,
कभी नाज़ुक तो कभी तुफानो सा .
शक्ल देख कर जो नज़रें झुका ले ,
कभी अपना तो कभी बेगानों सा .

जिंदगी का एक ऐसा हमसफ़र ,
जो समंदर है , पर दिल को प्यास नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं .

एक साथी जो अनकही कुछ बातें कह जाता है ,
यादों में जिसका एक धुंधला चेहरा रह जाता है .
यूँ तो उसके न होने का कुछ गम नहीं ,
पर कभी - कभी आँखों से आंसू बन के बह जाता है .

यूँ रहता तो मेरे तसव्वुर में है ,
पर इन आँखों को उसकी तलाश नहीं .
कोई तुमसे पूछे कौन हूँ मैं ,
तुम कह देना कोई ख़ास नहीं ..

Dr. shyam gupta said...

बहुत सुन्दर चित्र ,बबली /उर्मी ,

जो पवन मेरे तन से लिपत कर बही
चन्दनी सी महक लेके आती रही ।
मैं समझ ही गया ये सुरभि बावरी ,
तेरे तन की छुअन लेके गाती रही।

Dileepraaj Nagpal said...

Dil ko bahlane ko...ye khyaal acha hai.../
achi shyri hai aapki

अशोक कुमार पाण्डेय said...

nice sketch and emotional words...