Sunday, April 19, 2009


हम अपनी दोस्ती को यादों में सजायेंगे,
दूर रहकर भी बंद आंखों में नज़र आयेंगे,
हम कोई वक्त नहीं जो बीत जायेंगे,
जब याद करोगे तब चले आयेंगे !!

5 comments:

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

waah!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

तुम्हारी याद को लेकर, बड़ी ही दूर आये हैं।
छिपाकर अपनी आँखों में तुम्हारा नूर लाये हैं।

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत सुंदर .

sujata said...

very well said...the house of a friend is never far!!!

अभिन्न said...

हम कोई वक्त नहीं जो बीत जायेंगे,
जब याद करोगे तब चले आयेंगे !!

...........दोस्ती हो तो ऐसी ..लेकिन यह जज्बा अब कितने लोग रखते हैं