Thursday, April 30, 2009

तुम्ही हो न वो जिसके लिये मैं शाम-सुबू जिया,
तुम्हारी एक मुलाक़ात ने दिल को छू लिया,
बिना कुछ जाने ही दिल तुम्हें दे दिया,
नही मालूम, क्या था उस मुलाक़ात में,
जो अगर मिले तुम, तो तुम्हे सपनों में बुला लिया !

31 comments:

anilbigopur said...

Aaj didar, kal yaar, parson pyaar,
phir ekrar, phir intezar, phir takrar,
phir darar, sari mehnat bekar,
aur aakhir mein ek aur devdas at beer bar.

Arvind Mishra said...

A poem with aesthetic beauty !

manu said...

khoobsoorat,,,,,,,
kamaal,,,,,,,,
laajwaab,,,

kyaa halkaa saa waash kiyaa hai,,,
majaa aa gayaa,,,,,,,,,

अखिलेश शुक्ल said...

माननीय बबली जी
सादर अभिवादन
मैंने आपके ब्लाग की रचनाएं पढ़ी। मन को छू लेने वाली इन रचनाओं के लिए आभार। मैं एक त्रैमासिक साहित्यिक पत्रिका का संपादक हूं। आप चाहे तो इन रचनाओं को प्रकाशन के लिए अवश्य भेंजे।
अखिलेश शुक्ल
संपादक कथा चक्र
please log on also
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http://world-visitor.blogspot.com

sawan said...

kyaa baath he yaar.. interesting :) u have a heart full of love, very evident from ur shayari :)

anilbigopur said...

Ye pyari nigahein yaad rahengi, milkar na milne ki ada yaad rahegi, mumkin nahi ki main tumhe bhula dun, aur umar bhar tumhe bhi meri yaad rahegi

रवीन्द्र दास said...

sapnon me bula liya! kya bat hai, vaah!
teri duniya me kitni aur duniya,
jo badi mushkil.
kisi se ladke ham nikle,
kisi pe lut ke mar jaaen.

महामंत्री - तस्लीम said...

बबली जी, आपके कतात का जवाब नहीं।
----------
सावधान हो जाइये
कार्ल फ्रेडरिक गॉस

mark rai said...

तुम्हारी एक मुलाक़ात ने दिल को छू लिया,
बिना कुछ जाने ही दिल तुम्हें दे दिया,
nice once again....
ho sakta hai prem me yah bhi ho..
मेरी कामना है । सूरज की तपती धुप तुझ पर कभी न पड़े ।
तुम कही भी रहो । तुम्हारी जिंदगी चलती ही रहे ।
मै तो कुछ भी नही । मेरा साया भी तुझ पर न पड़े ।

archana said...

band palko mein
itna bar khwab hai
mere chahre ka noor
aur baho mein chand hai....

babli bahut pyara likha hai..
lajawab

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

तुम्हारी एक मुलाक़ात ने दिल को छू लिया,
बिना कुछ जाने ही दिल तुम्हें दे दिया,
नही मालूम, क्या था उस मुलाक़ात में,
जो अगर न मिले तुम, तो तुम्हे सपनों में बुला लिया !

prem ki abhivyakti hameshaa ki tarah......good

श्याम सखा 'श्याम' said...

तुम्हारी एक मुलाक़ात ने दिल को छू लिया,
अच्छा है अगर आगे यह जोड़े तो कैसा रहेगा-श्याम
तुम्ही हो न वो जिसके लिये मैं शाम-सुबू जिया

ajay kumar jha said...

muhabbat kee jo anokhee daastaan aapkee panktiyon mein mehsoos kartaa hoon doosree kisi mein nahin ye shiddat yun hee banee rahe aur kalam yun hee chaltee rahe.....ise dua ke saath

Syed Akbar said...

हमेशा की तरह लाजवाब...

विक्रांत बेशर्मा said...

बहुत अच्छे ....बहुत ही शानदार !!!!!!!!!!

Prem Farrukhabadi said...

लाजवाब!!!

jamos jhalla said...

ishq ki agni din mai hi sulagtee hai magar raat mai, vishesh kar sapno mai, sholaa ban kar bharaktee hai.so saavdhaan.

sujata said...

great Urmi!!Keep going!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

इक मुलाकात में ही शेर गढ़ लिया।
आँखों में अक्स देख कर ही प्यार पढ़ लिया।

Shamikh Faraz said...

bahus khubsurat kavita hai

Kishore choudhary said...

क्या गजब का ब्लॉग है आपका, सच में सत्रह अट्ठारह की उम्र याद आ गयी, तब ये साधन नही हुआ करते थे. आप बहुत उर्जावान हैं और मैं प्रार्थना करता हूँ कि आप हमेशा इतनी ही युवा बनी रहें.

आपकी कुछ रचनाएँ पढ़ी है बेहद सुन्दर , लाजवाब , क़यामत और क्या कहूं ... हमेशा लिखती रहिये.

hempandey said...

'जो अगर न मिले तुम, तो तुम्हे सपनों में बुला लिया !'

-सुन्दर |

शोभना चौरे said...

bhut sundar rchna.
bdhai

Saiyed Faiz Hasnain said...

दिल की बात अपने कितने साफ अल्फाजों में की है ,इसको मै बयाँ नहीं कर सकता। मेरे ब्लॉग को पढने का शुक्रिया ...........मेरे फलोव्र बने और भी अच्छी पोस्ट पढ़ाने का वादा करता हूँ ।

Harsh said...

babli ji aapne bahut achcha likha hai . bas aise hi likhte rahiye......

humanobserver said...

superb :)

ARUNA said...

wah kya kavita hai!

डॉ. मनोज मिश्र said...

नही मालूम, क्या था उस मुलाक़ात में,
जो अगर न मिले तुम, तो तुम्हे सपनों में बुला लिया !.........
सपनों का यथार्थ .बहुत खूब .

गर्दूं-गाफिल said...

बेहद सुन्दर , लाजवाब , ... हमेशा लिखती रहिये.

Rajat Narula said...

बहुत खुबसूरत रचना है!

RAJ SINH said...

इक मुलाकात में दिल इस तरह छुआ तुमने
फिर तो जीते रहे हर सुबहो शाम तेरे लिए .

ये तो मालूम नहीं क्या था उस मिलन में सनम
येभी मालूम नहीं बिछडे इस जनम के के लिए

जाओ मत आओ , मिलो ना मिलो , ना तद्पेंगे
कैसे आओगे नहीं रात , हर सपन के लिए