Tuesday, May 5, 2009

जुबां खामोश आंखों में नमी होगी,
यही तो बस दास्तान - - ज़िन्दगी होगी,
भरने को तो हर ज़ख्म भर जाएगा,
पर कैसे भरेगी वो जगह,
जहाँ पर तुम्हारी कमी होगी !

27 comments:

नारदमुनि said...

tu hai to tera fikr kya, tu nahi hai to tera jikr kya, narayan narayan

ARUNA said...

वाह बब्ली बहुत खूब!

नीरज कुमार said...

गम-ऐ-जिन्दगी
तूनें चोट ऐसी दी
हर टीस में
याद तुम्हें ही किया...

Saiyed Faiz Hasnain said...

कहते है यादे जिंदगी की सबसे अनमोल चीज़ होती है । अच्छी पोस्ट पढ़ाने का शुक्रिया

sujata said...

fantastic..this is easily one of your best I think.Lajawab!!

इरशाद अली said...

Bahut Khubsurat blog hae aapka, aapki hi tarha.

अभिन्न said...

उनकी जगह उनका ख्याल तो होगा
उनके न होने का मलाल तो होगा
.........आपकी लाजवाब शायरी को सलाम

महामंत्री - तस्लीम said...

कता के जरिए आपने बहुत खूबसूरत एहसास को बयां किया है। बधाई।

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SBAI TSALIIM

मोहन वशिष्‍ठ said...

उर्मी जी बहुत बेहतरीन लिखा है आपने सच

अर्चना गंगवार said...

waaaaaaaaaaaaaaaah...
kya baat hai......

meri khamoshi ko jo aankho se perta hai.....
na jane mujhse kyo vo itna pyar kerta hai....

aapne mere soye huye blog ko jaga diya......
thanks...

RAJ SINH said...

कुच्छ रह जाता जो खाली सा भरता ही नहीन ताउम्र कभी.
मौसम के बदलते रहने से या वक्त के आने जाने से
यादोन मे बन्धी, ख्वाबोन की डगर, उम्मीद के पक्के धागोन से
एक उम्र जिलाये रखता है किसमत से बन्धी कुछ यादोन से

अमिताभ श्रीवास्तव said...

wah//
" kuchh kami jindgi me honi chahiye
jeene ke liye insaa ko kuchh to chahiye/""

shayad aapke sher ka javaab he ye//

bahut sundar likha he aapne/ badhai

ajay kumar jha said...

saathe ye aasmaa hogaa , ...
aur saath ye jamee hogee...
tu saath na hai to kya hua..
bas ek wo jagah mujhe bhee bata de saathee.
jahaan yaadeein teri nahin hogee....

aapke lafjon mein ek ajeeb see kashish mehsoos kartaa hoon aur jisne kabhi mohabbat kee hogee wo jaroor hee mehsoos karegaa....

aap bas likhtee rahein.... khushiyaan bhee... gam bhee.... jyaadaa bhee...kam bhee.....

चंदन कुमार झा said...

बहुत हीं सुन्दर रचना......

डॉ. मनोज मिश्र said...

बहुत सही .

manu said...

khoobsoorat tasweer aur achchhee shaayri,,,

manu said...

oil,,,,,,???????????

Dr. shyam gupta said...

यूं तो हर ज़ख्म भर जायगा ---क्या बात है,
---दिल की लगी की ये लगी मीठी तो है प्यारी भी है,
---श्याम मीठी छुरी के क्या घाव भर पाये कोई।

Syed Akbar said...

बहुत हीं सुन्दर

शोभना चौरे said...

bhut khubsurt post.ise pdhakar yhi yad aya
'tere bina gidgi se koi shikwa to nhi .

मुकेश कुमार तिवारी said...

उर्मी जी,

आपको "कवितायन" मेरा प्रयास पसंद आया उसका धन्यवाद।

खूब लिखती हैं आप, वेदना जो दिल की गहराईयों तक जाती है, विरह जैसे मुखर हो अभिव्यक्ती पा जाता है इन रचनाओं में।

अब तो पहचान हो गई है, आना-जाना लगा रहेगा।

धन्यवाद,


मुकेश कुमार तिवारी

SWAPN said...

babli ji , aap mere blog par aain , comment kiya aapka hardik dhanyawaad,aapko mera blog pasand aya shukriya. aapke nimantran par aapke blog par aaya hun , gulabon ki tarah mahakti aapki chhoti chhoti rachnayon ne poore guldaste ka roop liya hua hai, rachnayen bahut achchi lagin . aapko badhai aur shubhkaamnayen, punah padharen, aapka swagat hai.

mark rai said...

बहुत सुन्दर! ........

ठान ले तो जर्रे जर्रे को थर्रा सकते है । कोई शक । बिल्कुल नही ।
अभी थोडी मस्ती में है । मौज कर रहे है ।
पर एक दिन ठानेगे जरुर ....

गर्दूं-गाफिल said...

बहुत हीं सुन्दर

satish kundan said...

बहुत ही सटीक बात कही है आपने...की उसकी कमी को कोई नहीं भर सकता जिसे हम चाहते हैं

अमिताभ भूषण "अनहद" said...

waah bahut khub
qya baat hai

creativekona said...

जुबां खामोश आंखों में नमी होगी,
यही तो बस दास्तान - ए- ज़िन्दगी होगी,.

बहुत खूबसूरत ..भाव...अच्छा शब्द संयोजन .
हेमंत कुमार