Thursday, May 7, 2009


कितनी बेचैन है ये सांसे मेरी,
बिना तेरे, बहुत रोती है ये आँखें मेरी,
कब से मेरी आंखों को नींद आती ही नहीं,
बाहें मांगती है मुझसे रातें तेरी,
जान जाओ के अब दिल कहीं लगता ही नहीं,
तुमको बुला रही है ये बाहें मेरी !

27 comments:

Kishore choudhary said...

वाह वाह क्या बात है बहुत खूब

ARUNA said...

वाह बब्ली क्या लिखती हैं आप ! अतिसुंदर कविता भी और चित्र भी !!

MUFLIS said...

रुमानियत से भरा दिल-फरेब जज़्बा
और मन से की हुई सच्ची पुकार ....
बेचैनी को चैन न मिल पाए ??
हो ही नहीं सकता ...!!
अच्छी रचना है...बधाई .
---मुफलिस---

रविकांत पाण्डेय said...

आह! दिल की गहराई से निकले शब्द बेहद पसंद आये। अच्छा लगा पढ़कर।

विनय said...

सीधे तीर की तरह लगती है दिल में

----
चाँद, बादल और शामगुलाबी कोंपलें

Harsh said...

bahutkhoob aapki yah shayariya man ko kaafi bha rahi hai........
shukria

RAJ SINH said...

मन का सहज बयान !

गर्दूं-गाफिल said...

वाह वाह क्या बात है बहुत खूब

manu said...

कमाल है,,,
कमाल है,,,
क्या लाजवाब भाव हैं,,,,,
एक दम मस्त कर देने वाले,,,,
बहुत बढिया,,,,

BrijmohanShrivastava said...

बहुत ही रचना लिखी गई है /वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कुछ शब्द बदल कर कोई इसे इस तरह भी कर सकता है कि """कितनी बेचैन हैं सांसे मेरी ,बिना नौकरी के रोटी हैं ये आँखे मेरी /कब से मेरी आँखों को नींद नहीं आती ,माँ बाप चाहते हैं मुझसे नौकरी मेरी /आदि इत्यादि इस तरह से कविता बढाते चले जाओ

डॉ. मनोज मिश्र said...

bahut sundr .

Nirmla Kapila said...

babli ji bahut sunder likha hai dil ki aavaaj ko shubhkaamnayen

VisH said...

hummmmm yaar lagta hai..aapko padta hu to lagta hai...dunia mai ROMANCE hi sab kuch hai....wahhh ustad wahhh ...yaar mujhe kuch tips do na shyri ke...ek line banti hai dusri nahi......why???
waise kuch likha hai abt love romance ke bare mai ....aapki tippdi ka intzar rahega....

jai ho mangalmay ho


ur dost

Vish

Kavi Kulwant said...

बाहें ही तो हैं जो खुशी देती है... गम भुलाती हैं..
पास बुलाती हैं गले लगाती हैं.. बहुत खूब..

Kavi Kulwant said...

http://kavikulwant.blogspot.com

sujata said...

Getting better by the day!!

नरेश सिह राठौङ said...

इस ब्लोग की एक एक रचना बहुत ही पठनीय है । मेरे जैसे कम अक्ल इंसान के भी समझ मे आ जाती है । फोटो जो लगायी गयी है वह भी बहुत ही सुरूची पूर्ण तरीके से लगायी है।

सुमित तोमर said...

sundar kavita...

satish kundan said...

सहज भाव एक प्रियतमा का अपने प्रियतम के लिए...बहुत सुन्दर रचना. मेरे ब्लॉग पर आने के लिए शुक्रिया

jamos jhalla said...

baanh dilbar ki junoon deti hai|
baanh behan ki sukoon deti hai||
baanh baanh mai farq hai kitna|
baanh maa ki jannat deti hai||

JHAROKHA said...

Apke blog par pahlee bar ayee hoon .lekin apkee rachnayen bahut badhiya lageen.shubhkamnayen.
Poonam

Abhishek Mishra said...

बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ.

रवीन्द्र दास said...

saaf bayani= sundar tasvir

aleem azmi said...

behtareen andaaz apka....lajawaab peshkash aapki hai ....likhte rahiye

प्रकाश गोविन्द said...

pahli baar aana hua hai aapke blog par . achha laga .

virah kee vedna ko darshaati huyi behtareen panktiyan likhi hain aapne.

shubhkaamnaayen.

sagarmeeruthi.blogspot.com said...

आप तो लाजवाब हैं आप से पटेगी फर्सत में आप का जीत लेंगे ये एलान है।

Dr. shyam gupta said...

ता उम्र मैं पीता रहूं,यारव वो मय उस हुश्न की ,
हो हशीं रुखसत का दिन ,बाहों में तू हो ज़ाम हो।