Thursday, June 11, 2009


उन्हें आदत है ज़ख्म देने की,
अपनी तो फितरत है गम छुपाने की,
आदत सी पड़ गई है आसूओं को पी जाने की,
क्या हसीन सज़ा दी है जालिम ने दिल लगाने की !

28 comments:

M Verma said...

aapne to gamgeen kar diya. bahut khub.
maine bhi abhi-abhi ek rachana 'Zazbat' par post kiya hai. Nazar-e-inayat idhar bhi kariyega.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत खूब, लाजवाब.

रामराम.

ARUNA said...

humesha ki tarah Badhiya hai Babli!!!

हृदेश सिंह said...

दिल लगी ही दिल लगी में दिल गया.
दिल लगाने का नतीजा मिल गया.
तुम क्यूँ हँसते हो तुम्हारा क्या गया.
हम तो रोते हैं हमारा दिल गया.
बेहद खुबसुरत शेर.लिखतें रहें.शुभकामनायें......

ओम आर्य said...

achchhi sher padhawaane ke liye shukriya

Rajim wale baba said...

mujhse naa puchho ki dard hai kaha ek jagah ho to batau ki yaha hai

Unseen Rajasthan said...

Babli Ji !! I mean your shayari is so in depth that it touches the Heart and soul..Great one...Also I Have Started My Own Website And Would Like You To Have A Look At It.I Would Love To Have Your Comments On That Also.Unseen Rajasthan

Science Bloggers Association said...

बहुत खूब लिखा है आपने।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

bunga raya said...

how are u friend

Jyothi said...

Very very nice..and very very very true... ;-)

In logon ko koi bathaye ki pyar karna kitna mushkil hai,
Dil mein unke pyar ke siva unke sitam bhi chupaana padtha hai.

Sitham or gham or kushi ke is guldasthe main, kahi kahi gulab ki khusboo hoti hai, kahi uske kaanton se jee bahlana padtha hai.

अक्षय-मन said...

आपकी शायरी का अंदाज़ हटकर है मुझे बहुत पसंद आती हैं......आपको ऊँचा मुकाम हांसिल हो.......
मैंने भी कुछ लिखा है...आप देखिएगा......

अक्षय-मन

डा. श्याम गुप्त said...

दिल के भावों को यूं छुपाये कोई।
चोत खा कर भी गुन्गुनाये कोई ।

satish kundan said...

बहुत खुबसूरत शिकायत..एक प्र्येमिका का अपने प्रेमी से...माँ बाग-बाग हो गया

bunga raya said...

fine to
i like this blog

अनिल कान्त : said...

लाजवाब.

शिवम् मिश्रा said...

ना पूछो दर्दमंदो से ख़ुशी कैसी हँसी कैसी ????
मुसीबत सर पे रहेती है ,कभी कैसी कभी कैसी !!!!!




Thanks for visiting my blog and liking it.

Best of Luck & keep doing the good Job.

●๋• सैयद | Syed ●๋• said...

इश्क का कभी कभी ये अंजाम भी होता है.. ... लाजवाब

SWAPN said...

har saja mohabbat men kubool hai
muhobbat ka to yahi usool hai.

aleem azmi said...

mere paas kahne ko ek hi alfaaz hai bahut UMDAA urmi jii

dr. ashok priyaranjan said...

nice poem

JHAROKHA said...

Bahut umda aur dil se nikalee hui rachana....badhai.
Poonam

sujata said...

awesome Urmi..really beautiful and true words!!

muskan said...

Bahut Khub BaBli ...
maja aa gaya.

sweet gabru said...

really very nice and interesting.

दिगम्बर नासवा said...

वाह...... क्या बात है पर सच कहा............... दिल जगाने की सज़ा तो मिलती ही है, जख्म होने तो लाज़मी हैं

RAJNISH PARIHAR said...

वो जखम देते नहीं थकते तो हम भी छुपाते नहीं थकते...!प्यार करने की शायद यही सजा तय होती है...!गम ,आंसू,रूठना,फिर मान जाना यही तो प्यार की सीढिया है...

woyaadein said...

इस हसीन सज़ा का भी, अपना एक अलग ही मज़ा है.
तभी तो सहते रहे हर सितम, कभी उफ़ तक नहीं कहा है.

ये भी खूब रही......

साभार
हमसफ़र यादों का.......

डॉ. मनोज मिश्र said...

लाजवाब....