Saturday, June 13, 2009


फूल खिलते हैं, बहारों का समा होता है,
ऐसे मौसम में ही तो प्यार जवा होता है,
दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है !

24 comments:

creativekona said...

दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है !

बहुत अच्छा शेर है .....आपकी अन्य रचनाओं की ही तरह ...
हेमंत कुमार

SWAPN said...

main kahan baitha hua karta hun shayri
asliyat to sab bayan karti hai diary
dil ki baaton ko agar kar dun bayan tumse
nazren jhukake sharm se bologe hai ri

aapki rachna padhkar jo man men aata hai likh deta hun.

●๋• सैयद | Syed ●๋• said...

लाजवाब !!

डॉ. मनोज मिश्र said...

ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है !...
सचमुच लाजवाब .

ताऊ रामपुरिया said...

बेहद खूबसूरत.

रामराम.

Prem Farrukhabadi said...

दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है
लाजवाब !!!!!!!!!!!!

Prem Farrukhabadi said...

दिल की बातों को होठों से नहीं कहते,
ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है
लाजवाब !!!!!!!!!!!!

aleem azmi said...

dil ki baat honto se nhi khte
waah ....bahut lajawaab urmi ji
paintings to mind blowing

God bless u

शिवम् मिश्रा said...

मैं राजनीती के उद्देश से नहीं लिखता | एक आम भारतीय नागरिक हूँ और वोही लिखता हूँ जो महेसूस करता हूँ | बस शायद एक ही फर्क है कि मेरी कोशिश रहेती है अपने आखें और कान खुले रख सकूं |

बाकी अपने ब्लोग्स में मुझे आमंत्रित करने का बहुत बहुत शुक्रिया | आशा है अपने ब्लोग्स को आप की उम्मीद पर खरा उतार सकूगा |

शिवम् मिश्रा said...

दिल में ना हो जुर्रत तो मुहब्बत नहीं मिलती,
खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती |
देखा था जिसे मैंने , कोई और था शायद ,
वोह कौन है जिससे तेरी सूरत नहीं मिलती ||

ARUNA said...

mujhe ajay singh rathod ki yaad aa gayi aur wo madhur geet sonali ka!!!!Ye chitr lajawaab hai Babli!

ओम आर्य said...

ये फशाना तो निगाहो से ब्यान होता है.............वाह.....वाह.....वाह.....

ज्योति सिंह said...

babli ji aapke blog pe aakar sabhi rachanaa padh daali ,sabhi bahut umda aur khoobsurat hai .kudart ke banaye anmol aur bhavuk rishton ke sabhi ahsaas bol uthe ,jo bayaan nahi kiya dil aap ke shabdo ne kah daala .achchhaa hi nahi laga sookun bhi mila .aap mere blog pe aai shukriya .aap swabhav se chanchal lagati hai .

नीरज कुमार said...

Maaf karen...
Achchha hai lekin shayad "Sarfarosh" film men Aamir ne ek gaane ke ant men yah kaha tha...hain naa!

दिगम्बर नासवा said...

ये अफसाना तो निगाहों से बयान होता है

सच kahaa.......प्यार में nigaahen ही सब कुछ bayaan करती हैं........... bahoot khoob

अक्षय-मन said...

ये तो कमाल का मुक्तक है......बहुत ही अच्छा लिखा है आपने इस बार भी ......प्यार को परिभाषित करती आपकी शायेरी बहुत कुछ कह गई......

अजय कुमार झा said...

कहते हैं हर जगह है,
पर ये सबको कहाँ होता है.
हो गया है उन्हें भी,कई बार,
कईयों को गुम होता है,,
जब ये होता है...तो कसम से,
कुछ और समां होता है...

बबली जी बहुत ही सुन्दर पंक्तियों में मैंने हमेशा की तरह कुछ जोड़ दिया है...

Unseen Rajasthan said...

Wow Babli Ji !! This is so True and great...I loved this one as usual..Thanks for sharing..Geeat One...

satish kundan said...

वाह.. वाह..बहुत खूब बबली जी...मन बाग़ बाग़ हो गया..

Non_prejudice said...

bahut hi umda

manu said...

यहाँ तो वाकई बहारों का समां ही लग रहा है...

डा. श्याम गुप्त said...

भला हुआ कब आदि अन्त ,प्रिय,
प्रणय मिलन के अनुनादों का।

rahul kumar said...

बहुत बढ़िया

डा. श्याम गुप्त said...

एक नहीं हज़ारों बार, बार बार, हर बार , हज़ारों गानों,अफ़सानों, गीतों में यही भाव आया है, शाश्वत कथन है।