Sunday, August 1, 2010


याद आए तो ऑंखें बंद करना,
हम चले भी जाए तो गम करना,
दोस्ती का एहसास दिल से कम करना,
ये अनमोल रिश्ता हमेशा निभाते रहना !

39 comments:

Dev said...

लाजवाब रचना .....बहुत खूब .

kshama said...

Babli,bahut,bahut pyari rachna!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

khoobsoorat babli ji!

Udan Tashtari said...

सही है

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

लाजवाब रचना ....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

आपको मित्रता-दिवस की बधाई!
--
मुक्तक बहुत बढ़िया है!

sheetal said...

Saath aapka kabhi na chodenge.
Dosti ka yeh bandhan kabhi na todenge.
waada karte hain aaj, hum aapse munh kabhi na modenge.

Unknown said...

thnx! 4 sharing.....

Dr. Zakir Ali Rajnish said...


बहुत ही प्यारी कविता कही है आपने।

…………..
स्टोनहेंज के रहस्यमय पत्थर।
क्या यह एक मुश्किल पहेली है?

राज भाटिय़ा said...

बबली जी आप के इन शेरो के सामने हमारे तारीफ़ के शव्द भी छोटे है, बहुत खुब सुरत शेर है धन्यवाद

Shayar Ashok : Assistant manager (Central Bank) said...

लाजवाब....
मित्रता-दिवस की बधाई!!!

Pushpendra Singh "Pushp" said...

rachna ke sath tasvir bhi bolti hai ....abhar

shama said...

Lovely! Many good wishes!

अरुणेश मिश्र said...

बबली ! बहुत अच्छा लिखा है । चित्र आनन्दवर्धक है ।
मित्रता बड़ा अनमोल रतन ।

vandana gupta said...

बहुत खूब्…………मित्रता दिवस की बधाई।

M VERMA said...

दोस्ती कायम रहे

DR. ANWER JAMAL said...

हीरे पन्ने माणिक मोती आसमान के तारे,

इस दुनिया में लोग जो दिखते ये सारे के सारे।

इनके बीच बिता कर जीवन रहा जो मुझ से दूर।। किसका बता कुसूर ?


मैंने तो यह कायनात ही जब तुझको दे डाली,

तेरे ही हित खड़ा रहा मैं, बन बग़िया का माली।

तूने फ़र्क़ किया अपनों में, जुल्म किये भरपूर ।। किसका बता कुसूर ?
http://vedquran.blogspot.com/2010/07/reply-me-anwer-jamal.html

डॉ टी एस दराल said...

बढ़िया ।
सुन्दर अहसास ।

Anamikaghatak said...

bahut sundar ........

Mithilesh dubey said...

लाजवाब रचना .....बहुत खूब .

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर.

रामराम.

रचना दीक्षित said...

बहुत खूब, सुन्दर अहसास

देवेन्द्र पाण्डेय said...

दोस्ती के नाम सुंदर शायरी..वाह!

मनोज कुमार said...

सही कहा, हर हाल में रिश्ता निभाया जाना चाहिए।

अजय कुमार said...

देर से आया ,क्षमा चाहुंगा -मित्रता दिवस पर अच्छी रचना ,बधाई ।

विनोद कुमार पांडेय said...

एक बढ़िया भाव समेटे हुई सुंदर प्रस्तुति..

पूनम श्रीवास्तव said...

ek dost ki hardik badhai.bahut khoobsurat shayari bilkul aapki hi tarah.
ये अनमोल रिश्ता हमेशा निभाते रहना !
poonam

rajesh singh kshatri said...

बहुत खूब ....

अभिन्न said...

दोस्ती का एहसास वास्तव में कभी कम नहीं होता ....ये रचना बहुत अच्छी लगी

सूफ़ी आशीष/ ਸੂਫ਼ੀ ਆਸ਼ੀਸ਼ said...

जिस लम्हे में मेरी याद आये,
उस लम्हे में ग़म मत करना!
मुस्का देना उस लम्हे में,
आँखों को तू नम मत करना!

KK Yadav said...

दोस्ती पर शानदार रचना..बधाई.

अंजना said...

बहुत खूब .

आप को भी मित्रता दिवस की हार्दिक बधाइयाँ एवं शुभकामनाएँ!

SATYA said...

लाजवाब रचना।
सुन्दर अहसास।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बबलीजी ! देर से ही सही पर दोस्ती दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं ...
बहुत दिन बाद फिर ब्लॉग खोला तो आपका प्यारा सा अभिनन्दन पाकर बहुत अच्छा लगा ...
आपकी यह रचना भी हमेशा के भांति बहुत अच्छी है ...

राजेश उत्‍साही said...

हम भी सलाम बजा जाते हैं बबली जी।

hem pandey said...

सच्ची दोस्ती का अहसास कभी दिल से कम नहीं होता.

जयकृष्ण राय तुषार said...

bahut sundar aur ramya rachna ke liye badhai

संजय भास्‍कर said...

लाजवाब रचना .....बहुत खूब .

Tulsibhai said...

" lajawab ...sabdo ka pirona koi aaapse sikhe ..bahut hi badhiya "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com