Thursday, August 26, 2010


आँसू को बहुत समझाया तन्हाई में आया करो,
लोगों के बीच आकर हमारा मज़ाक उड़ाया करो,
ये सुनकर आँसू टपक कर बोले...
भीड़ में भी आपको तन्हा पाते हैं इसलिए चले आते हैं !

44 comments:

हमारीवाणी.कॉम said...

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Sonal said...

bahut hi pyara ...
aansu to aa hi jaate hain waqt bewaqt..

A Silent Silence : अब उसका ख्वाब में आना

Banned Area News : Sahitya Akademi declares 'Bal Sahitya Puraskar 2010'

ओशो रजनीश said...

अच्छी पंक्तिया है ......
http://oshotheone.blogspot.com/

BK Chowla, said...

To be honest with you, the pictures here impress me equally

P S Bhakuni (Paanu) said...

आँसूं को बहुत समझाया तन्हाई में आया करो,
लोगों के बीच आकर हमारा मज़ाक न उड़ाया ,ghrey bhv honey ke bawjud bhi byang ka sa ahsaas karati panktiyan,
achchi prastuti hetu abhaar

Sayani said...

first of all my heartiest regards. The world of poetry you have created here is just mindblowing.

And thanks for your genereous compliment :)

Till then take care
Sayani

arvind said...

sundar panktiyan.....aansu bola ki jagah bole karen pls.

sheetal said...

yeh sunkar aansu tapak kar bola..bheed main bhi aapko tanha paate hain.
bahut sahi baat keh di aapne,yeh tanhai bhi aisi hoti hain,jo hume aansu ke moti de dete hain.

aur haan aapka bahut shukriya meri rachna ko sarhane ke liye.

AS said...

wow!

very touching... bheed mein tanha to aajkal har koi hi hai

:)

अशोक बजाज said...

बहुत ही सुन्दर रचना .

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बहुत ही बढ़िया!
--
इतना सुन्दर मुक्तक कि प्रशंसा के लिए
शब्द नहीं मिल रहे हैं!

Sumandebray said...

bheer main bhi taNha hai ... kya baat hai

Bahut khub

रचना दीक्षित said...

बहुत ही बढ़िया रचना .

Mithilesh dubey said...

बहुत ही उम्दा लगी अभिव्यक्ति ।

बेचैन आत्मा said...

भीड़ में भी आपको तन्हा पाते हैं इसलिए चले आते हैं !
..दिल को छू लेने वाली शायरी.
..बधाई.

महफूज़ अली said...

उफ्फ्फ........... क्या लिखा है आपने.... बहुत सुंदर.....................

राजकुमार सोनी said...

और भीड़ में शामिल होकर भी तन्हा वही होता है
जो यूनिक होता है
ईश्वर जिसकी परीक्षा लेता है
मैं पहले भी कहता था एक बार फिर कहता हूं कि आपकी पोस्ट भले ही छोटी होती है लेकिन काफी बड़ी होती है( उसके फलक में कई बातें समाहित होती है)
आपको बधाई

राजेश उत्‍साही said...

असल में भीड़ में आप तन्‍हा होती हैं,इसीलिए आंसू साथ निभाने चले आते हैं।

chitra said...

Such beautiful lines. Hats off dear.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर.

रामराम.

Divya said...

.
हर तरफ हर जगह, बेशुमार आदमी, फिर भी तन्हाइयों का शिकार आदमी।
.

राज भाटिय़ा said...

बहुत अच्छी प्रस्तुति।

अनामिका की सदायें ...... said...

वाह क्या बात कही है...भीड़ में भी आपको तनहा पाते है.....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

का बात है!लाजवाब कर दिया!!

शरद कोकास said...

कुछ बात तो है इनमे ।

Udan Tashtari said...

ओए होए...ये वफाई आँसूओं की...क्या बात है!!

ललित शर्मा-للت شرما said...


उम्दा पोस्ट-सार्थक लेखन के लिए आभार

प्रिय तेरी याद आई
आपकी पोस्ट ब्लॉग4वार्ता पर

वाणी गीत said...

भीड़ में तनहा पाते हैं तो चले आते हैं ...
क्या बात है ..!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...सुन्दर अभिव्यक्ति

अजय कुमार said...

गहरे जज्बात

PKSingh said...

bahut sundar...

सुनील गज्जाणी said...

सम्मानिया उर्मी मेम ,
नमस्कार !
सम्मानिया मैं पानी एक छोटी कविता सांझा करना चाहुगा -

'' दो बूंद तेरे चरणों में चदा दी
क्या हुआ आँखों का पानी ही तो है ""
आप के अच्छे ज़ज्बात पढ़े ,
साधुवाद
सादर !

डॉ. हरदीप संधु said...

भीड़ में भी आपको तन्हा पाते हैं इसलिए चले आते हैं.........बहुत ही खूब लिखा है...
चलो अब इस से आगे की बात करते हैं....

आँसुओं को कहो
मिल गया है मुभे
अब शब्दों का सहारा
अकेली हूँ या भीड़ में
अब आना न दोबारा !!!

Anand Rathore said...

आपका ब्लॉग पढ़ा ....आप बहुत ही सदा और सच्चा लिखती है.. ये आपकी खूबी है..

मनोज भारती said...

आपके अब तक पढ़े मुक्तकों में से बेहतरीन मुक्तक ...उम्दा !!!

अमिताभ श्रीवास्तव said...

वाह जी, बहुत दिनों बाद आये आपके ब्लॉग पर और बहुत सी रचनायें पढ ली। लगा जिन्दगी और प्रेम, जुदाई और उसकी पीडा..सब कुछ शब्दों में रचे-बसे से...

kavita said...

Very impressive !

भूतनाथ said...

oh.........uf.......main kahin to kahun kya.....??

manav vikash vigyan aur adytam said...

bahoot khoob babali ji keya darad hai

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

आँसू को बहुत समझाया तन्हाई में आया करो,
लोगों के बीच आकर हमारा मज़ाक न उड़ाया करो,
ये सुनकर आँसू टपक कर बोले...
भीड़ में भी आपको तन्हा पाते हैं इसलिए चले आते हैं !

क्या बात है, वाह...
एक शेर याद आ गया-
ज़िन्दगी की राहों में रंज-ओ-गम के मेले हैं
भीड है क़यामत की, और हम अकेले हैं...

Sunil Kumar said...

अच्छी प्रस्तुति।

AlbelaKhatri.com said...

गज़ब कर दिया बबली जी !

बहुत दिन बड़े आपको पढ़ने का अवसर मिला लेकिन पहली ही रचना आँख में आँसू की तरह भर गई.......

बधाई

बधाई

बधाई !

चौपटिया ROCKS said...

bahut khoob

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी