Tuesday, July 12, 2011


दिल के करीब आके वो जब दूर हो गए,
सारे सी ख्वाब मेरे चूर हो गए,
हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!

47 comments:

kshama said...

Kya khoob likha hai Babli!

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

यही है ज़माने का दस्तूर!! आपकी शायरी है वाकई मशहूर!!

mridula pradhan said...

gazab ki linen ........

Bhushan said...

हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!

हाँ इतनी बात ज़रूर है कि वफ़ा अबने भीतर से शक्ति पाती है और बेचैन नहीं होती. बहुत उम्दा पंक्तियाँ लिखी हैं.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब लिखा है ...

Harman said...

wah wah!
aapki shayari ke hum kayal hue!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

kya khoobsurat sher likha hai babli jee!

Rajesh Kumari said...

esa hi dastoor ho gaya hai jamaane ka.Bahut sunder sher hai.

vidhya said...

Kya khoob likha hai Babli!

Dr Varsha Singh said...

भावपूर्ण प्रस्तुति.... सुंदर रचना...

Rakesh Kumar said...

बबली जी,दिल की कचोट को बहुत सुन्दर ढंग से अभिव्यक्त किया है आपने.
प्यार करनेवाले नामी बदनामी से परे हो जाते हैं.
आप अपने दिल में बंद कर लीजिये उन्हें.
देंखें कैसे निकल पाते हैं फिर दिल से.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!

मन को उद्वेलित करने वाली भावपूर्ण रचना....

Murari Pareek said...

waah !!! tarotaajaa holiye lagaa meri hi baat likh di!!!

अजय कुमार said...

टूटे दिल की दास्ताँ

amrendra "amar" said...

kya baat hai waah, mashoor to hona hi tha.kaam hi aisa kiya tha.....badhai

mahendra srivastava said...

क्या बात है, बहुत सुंदर। एक शेर याद आ रहा है..

हर शख्श अपनी तस्वीर को बचा कर निकले,
ना जाने किस मोड पर किस हाथ से पत्थर निकले।

BK Chowla, said...

Every word is so meaningful

सुधीर said...

जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए! बहुत खूब लिखा है ...

sheetal said...

bahut khub likha aapne.

सदा said...

वाह ... बेहतरीन ।

sm said...

beautiful pic
beautifully written poem

डॉ टी एस दराल said...

जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!
vah vah !
सुंदर.

mahendra verma said...

हमेशा से ऐसा ही होता आया है।
मुक्तक बहुत अच्छा लगा।

veerubhai said...

बहुत खूब !एक शैर आपकी नजर -कितनी आसानी से मशहूर किया है खुद को ,मैंने अपने से बड़े शख्स को गाली दी है .

Kunwar Kusumesh said...

अजब/ग़ज़ब.

संतोष त्रिवेदी said...

प्यार में मशहूर होने की ज़रुरत भी नहीं है !
वैसे रचना सुन्दर है !

दिगम्बर नासवा said...

ये ज़माने का दस्तूर है ... लाजवाब ...

knkayastha said...

सच्ची बात कही आपने...

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आज पूरे 36 घण्टे बाद ब्लॉग पर आना हुआ!
--
आपकी रचना पढ़ी।
बहुत पसंद आई!

Patali-The-Village said...

बहुत उम्दा पंक्तियाँ लिखी हैं| सुंदर रचना|

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

बबली जी खूबसुरत शायरी आप की -इस ज़माने में ऐसा ही होता है बेवफा ही मजा लेते हैं ...

जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!

शुक्ल भ्रमर ५
भ्रमर का दर्द और दर्पण

Dr. shyam gupta said...

बदनाम होंगे तो क्या नाम न होगा....

शिखा कौशिक said...

vah kya bat kahi hai aapne .badhai .

JAGDISH BALI said...

Superb.

Vaneet Nagpal said...

बबली जी,
नमस्कार,
आपके ब्लॉग को अपने लिंक को देखने के लिए कलिक करें / View your blog link के "सिटी जलालाबाद डाट ब्लॉगपोस्ट डाट काम" के "हिंदी ब्लॉग लिस्ट पेज" पर लिंक किया जा रहा है|

कविता रावत said...

जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए
...yahi to aajkal ka dastur hai..
bahut badiya..

सुमन'मीत' said...

waah bahut khoob

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!
सही कहा बबली जी...बहुत अच्छा मुक्तक है.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

blogs ne hame awara bana diya... blog bhraman ki aadat ne banjara bana diya..astreliya mein jamun nahin milte padhkar yahan aaya..phir jamun ke baad aapke behtarin shyri ka lutf uthaya..aapne ravasriya paheliyon ko bahut suljhaya..per apne sher mein uljhan baar baar upyog kar uljhaya..blog banjaar na bante..kaise kalam ke ustadon se milte...haan jaate jaate keh doon astralia mein jaamun ka ped jarur lagayiyega..usko pehla ped hone ka aur aapko lagane wale ka khitab hasil ho jayega...kabhi waqt ho to ghumte hue mere blog pe bhi aayiyega

Manish Kr. Khedawat said...

bahut khoob :)
iss bedard jamane ne ki nahi kadr hamari ,
varna wafa ke bazar mein hamara daam bahut tha |

veerubhai said...

हम आह भी भरते हैं तो हो जातें हैं बदनाम ,
वो कत्ल भी करतें हैं तो चर्चा नहीं होता .

RameshGhildiyal"Dhad" said...

fir se ek umda ashaar.....waah ...aap yun hi hamaari gali aate rahen milne ka vada nibahte rahen...hame be intehaan muhabbat ho gai hai..jara saraahte rahen..

Bikramjit said...

bahoot khoob kaha, duniya ka dastooor hai yeh...

Bure log hamesha mashhoor or khoob paisa kamate hain ..

Bikram's

Manish said...

स्केच से नजर हटे तो पंक्तियों पर ध्यान जाये.. :P :P

सहज साहित्य said...

सही बात कही उर्मि जी
हमने वफ़ा निभाई तो बदनामियाँ मिली,
जो लोग बेवफा थे ,वो मशहूर हो गए!
-जिसकी आत्मीयता सच्ची होती है , उसका सम्बन्ध नि:स्वार्थ होता है । वह धोखा खा सकता है , दे नहीं सकता ।

nivedita said...

bahut khoob..
from where you get the inspiration???

CSK said...

दिल के करीब तुमको दिल महसूस करता है,
मगर तेरे लिए गफलत ना ये महसूस करता है ,
कोई हद तो रही होगी तेरे बेरहम सितम की,
क्या खुद को ही खुद से दूर कोई महसूस करता है?

आपने बहुत मस्त लिखा है बबली जी,बहुत दिनों के बाद ब्लॉगर पे आया हूँ,इसके लिए क्षमा चाहता हूँ...आशा करता हूँ कि आपके प्यार भरे नगमों से मुझे भी थोड़ी राहत मिलेगी...