Thursday, August 11, 2011


कभी दिल को, कभी शम्माँ को जलाकर रोए,
तेरी यादों को सीने से लगाकर रोए,
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी,
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए !

42 comments:

: केवल राम : said...

वाह वाह वाह .....गजब ...!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत शानदार मुक्तक लिखा है आपने तो!
रोने का ढंग अच्छा लगा!

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

.


उर्मि जी

कमाल का लिखा है …
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए


वाह वाऽऽह… बहुत ख़ूब !


रक्षाबंधन एवं स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाओ के साथ

-राजेन्द्र स्वर्णकार

Rakesh Kumar said...

विरह का सुन्दर प्रस्तुतीकरण किया है आपने.
सूरदास जी का गोपियों के विरह का वर्णन याद आ रहा है
'अँखियाँ हरि दर्शन की प्यासी
देखन चाहत कमल नयन को
निशदिन रहत उदासी'

हृदय में प्यार की पीर जगाई है आपने.

सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

रक्षा बंधन के पावन पर्व पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएं.

Maheshwari kaneri said...

रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए .....
बहुत खूब...रोए भी तो तस्वीर बनाकर रोए...क्या बात है...?????

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या ।

विक्रांत बेशर्मा said...

बहुत खूब कहा आपने ....बड़े दर्द से दर्द को बयां किया है !!!!!

Suresh Kumar said...

बबली जी...उम्दा शायरी...
अर्ज़ किया है..
ग़ुस्ताख़ियों के शमां में, बरबादियों का ज़श्न हुआ,
महफ़िल-ए-बेवफ़ाई में, हर लम्हा अश्क से बयां हुआ.
जो इक ग़ुस्ताख़ नज़र ने, हाल-ए-दिल को पढ़ लिया.
जश्न-ए-बरबादी, महफ़िल-ए-इश्क में बदल गयी.

mridula pradhan said...

bahut sunder......

Rajesh Kumari said...

bahut achche shabd umda shayeri.

Bhushan said...

चाँद की सूरत बना कर रोए.
बहुत खूब.

vidhya said...

वाह वाह वाह .....गजब ...!
क्या कहूँ

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..सुन्दर

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर.

रामराम.

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर कोमल भावों को संजोये हुए शब्द ...

देवेश प्रताप said...

lajwaab .....prastuti .

डॉ टी एस दराल said...

बहुत गहन अभिव्यक्ति ।

SAJAN.AAWARA said...

Bahut khub mam, apne to rula hi diya....
Jai hind jai bharat

smshindi By Sonu said...

बबली जी

कभी दिल को, कभी शम्माँ को जलाकर रोए,
तेरी यादों को सीने से लगाकर रोए,
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी,
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए

बहुत ही अच्छा लिखा है.
रक्षा बंधन के पावन पर्व पर आपको हार्दिक शुभ कामनाएं.

Kunwar Kusumesh said...

गजब है, गजब है.

SACCHAI said...

उम्दा ... जबरदस्त भाव ...आह ! दिल से निकले अल्फाज़ को ,दर्द में भिगो दिए है आपने

kavita said...

Admirable ! Very nice.

kshama said...

Wah Babli! Kamaal kar diya!

Unseen Rajasthan said...

Hi Babli Di !! Visiting you after a long time !! This is really a beautiful poem !! I loved it !! great..

Harman said...

Wow! gazab..
Wonderfully done!

sm said...

तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए
beautifully written

अजय कुमार said...

खूबसूरत

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

रक्षाबन्धन के पावन पर्व पर हार्दिक शुभकामनाएँ!

mahendra verma said...

रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए

लाजवाब पंक्तियां।
रोने के बाद असीम शांति का अनुभव होता है, इसलिए रोना भी जरूरी है।

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी,
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए !
बहुत सुंदर...बधाई.

Sawai Singh Rajpurohit said...

आज का आगरा ,भारतीय नारी,हिंदी ब्लॉगर्स फ़ोरम इंटरनेशनल , ब्लॉग की ख़बरें, और एक्टिवे लाइफ ब्लॉग की तरफ से रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं

सवाई सिंह राजपुरोहित आगरा
आप सब ब्लॉगर भाई बहनों को रक्षाबंधन की हार्दिक बधाई / शुभकामनाएं

Manish Kr. Khedawat said...

aapka jawaaab nahi :)

Sunil Kumar said...

वाह वाह सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

Dr Varsha Singh said...

मन को छूने वाली...ख़ूबसूरत रचना..

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

बबली जी क्या बात है -शानदार मुक्तक -ये तस्वीरें भूलती कहाँ है ......
आप सब को भी राखी और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभ कामनाएं
धन्यवाद आप का
भ्रमर५
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए

chirag said...

kya bat hain
vah vah

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, said...

वाह दिल को छु गए शब्द

veerubhai said...

तेरी यादों को सीने से लगाकर रोए,
रात की गोद में जब सो गई दुनिया सारी,
तो हम चाँद की इक तस्वीर बनाकर रोए ! बहुत खूब !बस आपके पहलू में आये ,रो दिए . यौमे आज़ादी की सालगिरह मुबारक .

http://veerubhai1947.blogspot.com/
संविधान जिन्होनें पढ़ा है .....
रविवार, १४ अगस्त २०११


http://kabirakhadabazarmein.blogspot.com/
Sunday, August 14, 2011
चिट्ठी आई है ! अन्ना जी की PM के नाम

NEELKAMAL VAISHNAW said...

नमस्कार....
बहुत ही सुन्दर लेख है आपकी बधाई स्वीकार करें
मैं आपके ब्लाग का फालोवर हूँ क्या आपको नहीं लगता की आपको भी मेरे ब्लाग में आकर अपनी सदस्यता का समावेश करना चाहिए मुझे बहुत प्रसन्नता होगी जब आप मेरे ब्लाग पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएँगे तो आपकी आगमन की आशा में पलकें बिछाए........
आपका ब्लागर मित्र
नीलकमल वैष्णव "अनिश"

इस लिंक के द्वारा आप मेरे ब्लाग तक पहुँच सकते हैं धन्यवाद्

1- MITRA-MADHUR: ज्ञान की कुंजी ......

2- BINDAAS_BAATEN: रक्तदान ...... नीलकमल वैष्णव

3- http://neelkamal5545.blogspot.com

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... कमाल की कप्लाना है ... गज़ब अंदाज़ ....

neelam chand sankhla said...

yadon ko yad karne kee achhi rah. sunder kavita.

mere blog se yad ke liye-----

aaj yad kya aai unkee
kabra se uthaker aansu bahane lage.

www.nature7speaks.blogspot.com

sheetal said...

wah kya baat hain.
bahut bahut sundar likha aapne