Monday, October 31, 2011


आँसू में ढूंढों हमें,
दिल में बस जायेंगे तुम्हारे,
तमन्ना हो अगर मिलने की,
तो बंद आँखों में नज़र आयेंगे !

38 comments:

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर रचना| धन्यवाद|

Rahul Bhatia said...

अति भावुक!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

ji zarur...sahee kahaa aapne

केवल राम : said...

बंद आँखों से नजर आना ....सुंदर भाव ....गहरी बात ...!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत खूब!

Vivek Jain said...

बहुत सुन्दर ,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

सदा said...

वाह ...बहुत बढि़या ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब

डॉ टी एस दराल said...

मन की भी आँखें होती हैं .
सुन्दर रचना .

Manish Kumar Khedawat said...

bahut sahi :)

mridula pradhan said...

bahot pyari......

Kunwar Kusumesh said...

beautifully written.

dheerendra said...

आसुओ में मत ढूढो हमे
दिल में बस जायेगें तुम्हारे
तमन्ना हो अगर मिलने की
तो बंद आखो में नजर आयेगें,
क्या खूब लिखा आपने,सुंदर पोस्ट.....

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
छठपूजा की शुभकामनाएँ!

M VERMA said...

विरोधाभास ... बहुत सुन्दर

kshama said...

Hamesha kee tarah bemisaal!

Harman said...

WAH WAH!
gr8..
annkhen hi dil ka haal byaan karti hain ...khuli ho yaa band !

Sunil Kumar said...

vah vah .....

Bhushan said...

आँसू में ढूँढना और बंद आँखों में नज़र आना स्थिति से जुड़े अहसास हैं. दोनों का महत्व है. बढ़िया रचना.

BK Chowla, said...

Lost in thoughts

ashok andrey said...

bahut gehre bhav liye iss kavita par apko badhai.

रचना दीक्षित said...

वाह...वाह....बहुत खूब

JHAROKHA said...

bahut khoob babi ji
kya baat khi hai ---mast -mast
aanand aa gaya padh kar
bahut bahut badhai
poonam

SAJAN.AAWARA said...

bahut badhiya...
tamnna ho jab milne ki to band aanhkhon me najar aayenge..
behtreen


jai hind jai bharat

आशा जोगळेकर said...

सुंदर । बंद करके झरोखों को.........

dheerendra said...

मेरे नये पोस्ट पर स्वागत है ....

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

प्रिय बबली जी आप को और आप की समस्त मित्र मण्डली परिवार को भी दिवाली और काली पूजा की ढेर सारी हार्दिक शुभ कामनाएं -थोडा विलम्ब से आ सका
सुन्दर रचना प्यारे भाव --मिलने की तमन्ना आँखों में ही क्यों --आइये इस जज्बात को मूर्त रूप लेने दें न
भ्रमर ५

Human said...

nice lines!

vidya said...

वाह...दाद कबूल कीजिये.

hot girl said...

nice poem

प्रेम सरोवर said...

प्रस्तुति अचछी लगी ।मेर पोस्ट पर आपका इंतजार रहेगा । धन्यवाद ।

R.Ramakrishnan said...

Khoobsoorat Kavita. Absolutely wonderful sentiments

sm said...

तो बंद आँखों में नज़र आयेंगे

beautiful

Kya Kahena

mahendra verma said...

तो बंद आँखों में नज़र आयेंगे !

कुछ चीजें बंद आंखों से ही नजर आती हैं।
बहुत बढि़या ।

प्रेम सरोवर said...

आपका पोस्ट अच्छा लगा ।मेरे नए पोस्ट पर आप आमंत्रित हैं । धन्यवाद ।

अनुपमा त्रिपाठी... said...

Exellent...dil ko chhoo gayi ...

veerubhai said...

सुन्दर मनोहर भाव लिए हैं दोनों भाव कणिकाएं .

नीरज कुमार said...

बहुत खूब। क्या सादगी है और कशिश भी