Thursday, November 10, 2011


ज़माने से नहीं, तन्हाई से डरते हैं,
प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं,
मिलने की उमंग है दिल में लेकिन,
मिलने के बाद तेरी जुदाई से डरते हैं !

40 comments:

शिवम् मिश्रा said...

जुदाई का डर तो हर एक को सताता है ... बढ़िया ...

knkayastha said...

सुंदर...
आपके छोटे-छोटे छंद मनभावन होते हैं सदा ही... मैंने भी दो कोशिश की है... आपके समालोचना का इंतजार है...

Bhushan said...

खूबसूरत पंक्तियाँ. वाह!

kshama said...

Sach! Milanke baad aanewaalee judai behad tanha kar detee hai.

mridula pradhan said...

kya baat hai.....

सदा said...

वाह ...बहुत खूब।

अजय कुमार said...

sundar abhivyakti

anju(anu) choudhary said...

waha bahut khub...judayi ke ehsas se hi dar lagta hai

अनुपमा त्रिपाठी... said...

ekdam pate ki baat ....
bahut sunder ...Babli ji ...

Kunwar Kusumesh said...

वाह वाह,लाजवाब .

Rahul Bhatia said...

अकेलेपन का डर नहीं,जुदाई का डर तो हर एक को सताता है!

रचना दीक्षित said...

वाह बहुत खूबसूरत पंक्तियाँ

संजय भास्कर said...

beautiful lines....babli ji

महेन्द्र श्रीवास्तव said...

बहुत सुंदर
क्या कहने

Human said...

बहुत अच्छी पंक्तियाँ,अच्छा मुक्तक !

अपने विचारों से अवगत कराएँ !
अच्छा ठीक है -2

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

आपकी इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है! सूचनार्थ!

डॉ टी एस दराल said...

ओहो ! ऐसे कब तक डरते रहेंगे !
लेकिन पंक्तियाँ अति सुन्दर हैं ।

Rakesh Kumar said...

बबली जी,आप भी क्या खूबसूरत लिखते हैं.
सुन्दर लेखन से सीधे दिल में ही उतरते हैं.
भले ही आप बहुत बहुत दूर हों
पर हमें तो आप दिल के पास ही लगते हैं.

आपकी अनुपम शायरी के लिए दिल से आभार.

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

सच का सामना करें!! अच्छी प्रस्तुति!!

M VERMA said...

ओह ! यही तो एक डर है
वर्ना ....
ख़ूबसूरत शेर

devendra gautam said...

सुन्दर रचना. हार्दिक बधाई स्वीकार करें.

SAJAN.AAWARA said...

kisi ko khone ka dar hamesha laga hi rahta hai,
jo ek baar sah le is dard ko wo awara kahlata hai....

bahut badhiya ser likha hai mam...
jai hind jai bharat

Hitesh said...

Behtareen !

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

sab jaante huye bhee
mohabbat se jeene waale
mohabbat karnaa nahee bhoolte


Congratulations
enjoyed your writings
keep writing,best wishes

अनुपमा पाठक said...

सुंदर पंक्तियाँ!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत खूब...
सादर...

मनोज भारती said...

डर-डर के जिए तो क्या जिए
प्यार नहीं किया तो क्या जिए
विरह-अग्न न पाई तो क्या पाया
मिलन ऐसा पाओ कि विरह न हो

बहुत सुंदर!!! भावपूर्ण मुक्तक

Harman said...

Wah wah!
judiaa...or judaaiyan ..is kinda of stressful feeling..
you small little poetry has gr8 impact on the word "judaai"like pangs of parting.

BK Chowla, said...

yes---Juddai is worst that can happen to anyone.

mahendra verma said...

बहुत अच्छी पंक्तियां, सुंदर भाव।

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

दिल की सच्चाई कहती सुंदर पंक्तियाँ

Rajeev Panchhi said...

very nice lines! Congrats!

dheerendra said...

बहुत सुंदर रचना बेहतरीन पोस्ट...बधाई....

Rajesh Kumari said...

behad khoobsurat panktiyan.

amita kaundal said...

vaah kya khoob likha hai urmi ji badhai..
saadar,
amita kaundal

चन्दन..... said...

बहुत सुन्दर वाह!वाह!

आशु said...

Babli Ji,

Wonderful and meaningful..Your four liners are always packed with so much meaning and feelings!!

JAY SHANKER PANDEY said...

what a truth and irony!प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं. A very true picture of love has been drawn in these few lines.

JAY SHANKER PANDEY said...

What a truth and irony! प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं. Very beautiful lines. A very true picture of love and its dark side has been drawn in these few lines.

Rajat Narula said...

very nice poetry...