Friday, January 6, 2012


जाने कौन हैं हम,
जाने क्या है मेरी पहचान,
कोई तो हो जिसे हम कह सके अपना,
हम जिसके लिए रहे अंजान !

50 comments:

Surendra shukla" Bhramar"5 said...

उर्मी जी क्षणिकाएं बहुत सुन्दर बन रही हैं आज कल ..आप इस में माहिर हैं ..आप की छवियाँ बोलती है ....
जय श्री राधे
भ्रमर ५

Sunil Kumar said...

bahut khub mubarak ho

Sanju said...

बहुत बेहतरीन............

Anupama Tripathi said...

sunder rachna ...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बढ़िया भाव.

महेन्‍द्र वर्मा said...

बिल्कुल सही कहा, हम कौन हैं, स्वयं नहीं जानते !

Dr.NISHA MAHARANA said...

very nice.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति,सुंदर रचना......
welcome to new post--जिन्दगीं--

डॉ टी एस दराल said...

सार्थक कामना ।
शुभकामना जी ।

Anonymous said...

vo kahi nahi bas hain yahi
dhalti shaam mein to
kaali raato mein kahi

nice shayari urmi

Unknown said...

waah waaaaaaaaaaaaaaaaaaaaah !

सम्वेदना के स्वर said...

आज फलसफाना शायरी!!

नश्तरे एहसास ......... said...

बहुत सुंदर क्षणिका.....काफी वक़्त के बाद आपके ब्लॉग पर आना हो पाया पर पढ़ के आज भी एक नयापन है....आपको एवं समस्त परिवार को नव वर्ष की शुभकामनायें

Nirantar said...

naa so sakaa naa jaag sakaa
kisi apne kee talaash mein
nirantar bhataktaa rahaa
zindgee yun hee gujaartaa rahaa

hamaarethoughts.com said...

nice..very beautiful!

Jay dev said...

कोमल भाव सुंदर रचना |

M VERMA said...

जी हाँ कोई एक ऐसा होना ही चाहिए
सुन्दर

लोकेन्द्र सिंह said...

समस्या... सबकी यही कामना

Jeevan Pushp said...

बहुत सुन्दर ..!

BK Chowla, said...

Beautiful lines

Patali-The-Village said...

बहुत बढ़िया प्रस्तुति|

मनोज भारती said...

दूसरा जितना मुझे जानता है
उतना मैं स्वयं नहीं जानता
इसीलिए चाहत है दूसरे की
जिसके लिए मैं अजनबी न हूं
और वह मेरे लिए अंजान न हो

बहुत सुंदर मुक्तक!!!

sm said...

न रहे अंजान
बहुत बेहतरीन

mridula pradhan said...

very good.

shama said...

Wah,Babli,wah!

विभूति" said...

भावों से नाजुक शब्‍द.

Rahul Bhatia said...

बहुत सुंदर रचना!

मेरा मन पंछी सा said...

ekdam sachhi bat kahi hai apne....
apke blog par aakar dil khush ho gaya....

Ramakrishnan said...

Beautiful shayari. So simple yet so meaningful.

Anju (Anu) Chaudhary said...

waah bahut khub

Rajput said...

बेहतरीन रचना.
नव वर्ष की शुभकामनायें

virendra sharma said...

न जाने कौन हैं हम,
न जाने क्या है मेरी पहचान,
कोई तो हो जिसे हम कह सके अपना,
हम जिसके लिए न रहे अंजान !
खूब सूरत है ये भाव कणिका विविधरूपा नारी सी .साज में श्रृंगार में .

प्रेम सरोवर said...

आपके पोस्ट पर आकर का विचरण करना बड़ा ही आनंददायक लगता है । पोस्ट अच्छा लगा । मेरे नए पोस्ट "लेखनी को थाम सकी इसलिए लेखन ने मुझे थामा": पर आपका बेसब्री से इंतजार रहेगा । धन्यवाद।

सहज साहित्य said...

कोई तो हो जिसे हम कह सके ं अपना -बहुत भावपूर्ण पंक्ति है। यही तो जीवन की पहचान है कि अपनापन हमको अतिरिक्त शक्ति प्रदान करता है ।

Rajesh Kumari said...

bahut umda likha hai.badhaai.

सदा said...

बहुत बढि़या

कल 11/01/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्‍वागत है, उम्र भर इस सोच में थे हम ... !

धन्यवाद!

vikram7 said...

बेहतरीन,अति सारगर्भित
vikram7: हाय, टिप्पणी व्यथा बन गई ....

Yashwant R. B. Mathur said...

बेहतरीन।


सादर

P.N. Subramanian said...

यहाँ भी वही प्रतीक्षा ही तो है. इंतज़ार ख़त्म हो जाना भी बड़ा डरवाना हो सकता है. सुन्दर रचना. आभार.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..सुन्दर प्रस्तुति

Sawai Singh Rajpurohit said...

बहुत ही खूबसूरत प्रस्तुति!

sangita said...

क्या बात है |

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत खूब... शानदार....

Rakesh Kumar said...

सदा जी की हलचल में आपकी प्रस्तुति को देखकर बहुत प्रसन्नता मिली.

मकर सक्रांति और लोहड़ी की शुभकामनाएँ.

धीरेन्द्र सिंह भदौरिया said...

बहुत सुंदर सारगर्भित प्रस्तुति,बढ़िया अभिव्यक्ति रचना अच्छी लगी.....
new post--काव्यान्जलि : हमदर्द.....
आप भी फालोवर बने तो मुझे हार्दिक खुशी होगी,...

dinesh aggarwal said...

सुन्दर, अति सुन्दर।
चंद लाइनों में बड़ी बात।
कमाल की कल्पना शक्ति।
बधाई........

रचना दीक्षित said...

सार्थक विचार और बेहतरीन प्रस्तुति.

Bikram said...

bahut khoob kaha..
god willing there will be someone for somebody ..

Bikram's

ASHOK BIRLA said...

bahut sundar.!!!

virendra sharma said...

न जाने कौन हैं हम,
न जाने क्या है मेरी पहचान,
कोई तो हो जिसे हम कह सके अपना,
हम जिसके लिए न रहे अंजान !
सुन्दर है यह भाव कणिका किसी प्रसन्न बदना सी .