Thursday, April 16, 2009


चाहत है आपकी चाहत को पाने की,
चाहत है चाहत को आजमाने की,
आप चाहे चाहे पर,
चाहत है आप की चाहत में मिट जाने की !!

16 comments:

manu said...

बबली जी,
पधारने का धन्यवाद....
आप मेरे ब्लॉग तक कैसे आयी.....?
अछे मुक्तक लिखे हैं आपने....और उस पर पेंटिंग्स ..
कमाल .......

डा.रूपेश श्रीवास्तव(Dr.Rupesh Shrivastava) said...

बबली बहन झूठी प्रशंसा करना मेरी आदत नही है आपका संग्रह बहुत सुन्दर है और सबसे अच्छी बात है कि सचित्र है....लिखती रहिए
जय जय भड़ास

विनय said...

aapka msg mila, your poetry is good!

If you have time may read this...

Blogging And Password Hacking Part-I

Amit K Sagar said...

Nice Written. Keep it up

Science Bloggers Association said...

बहुत खूबसूरत कता है। मुबारकबाद कुबूल फरमाएँ।
----------
जादू की छड़ी चाहिए?
नाज्का रेखाएँ कौन सी बला हैं?

Neeraj said...

AANKHO KO SUKUN MILTA HAI AUR MILTI HAI RAHAT DIL KO...
BAHUT BADHIYA HAI...

VisH said...

firsly first welcome to my world ....i hope u like my blog and i feel tht ur visit at my blog its quite regular......

aab baat aapke blog ki....kya kahooo ek baat to hai....aapke jo sher hai .....mindblowing yaar...waise yaar mujhe shyri pasand to hai lakin main shayri kar nahi sakta....so if u have any tips for me plz give it to me...??

Jai HO Mangalmay Ho

aleem azmi said...

nice ghazal aapke likhne ka shaili bahut umda hai

aleem azmi said...

waise ghzal meri kamzori agar jab bhi aap likhe ek do ghzal hume bhi bhej diya karein aapki meherbaani hogi

मोहन वशिष्‍ठ said...

वाह जी वाह बेहतरीन शायरी लेकिन कोई नई बात थोडे ही हे आपका तो आगमन ही धांसू तरीके हुआ है अच्‍छा लिखते हैं लिखते रहो

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

गागर मे सागर!प्रेम की पराकाष्टा प्रदर्शि बहुत ही सुन्दर भावपूर्ण रचना!आपका ब्लाग बहुत अच्छा लगा।
मैं अपने तीनों ब्लाग पर हर रविवार को
ग़ज़ल,गीत डालता हूँ,जरूर देखें।मुझे पूरा यकीन
है कि आप को ये पसंद आयेंगे।
त करती

अभिन्न said...

चाहत है आप की चाहत में मिट जाने की !!

क्या चाहत की है !इतने सरल ओर जुबान पर चढ़ जाने वाले शेर है की बार बार पढने ओर कहने को दिल करता है ,उर्मी जी आपने ये कैसे कह दिया की हम बहुत बड़े लेखक है सच में मेरी तो हसी ही नहीं थम रही है .....अजी हम मात्र एक पाठक है अच्छा लिखा पढने के ,बस अगर कुछ
लिख लेते है तो आप सरीखी हस्तियों से नक़ल मार मार कर लिख लेते है
साभार

भूतनाथ said...

अरे भई यूँ कि ये बबली जी कौन हैं.....??
मैं बताऊँ....??
बबली जी इस समय मौन हैं....!!
तो बबली जी भला लैब कब खोलेंगी....??
जब वो चाँद शेर कह लेंगी....!!
लेकिन भई ये तो सवा शेर हैं....!!
अबे चुप....तू बड़ा गीदड़ है....!!
सिफ तौल की भाषा आती है तुझे....??
इनमें वजन कम....गहराई ज्यादा है....!!
और बोल मेरे मन के मुताबिक ज्यादा है...!!
तू बबली जी को बोल....
थोडा वजन भी गर ले आयें वो....
तो इस शेरोन के जगत में भी छा जाये वो....!!
सच...ये बिलकुल सच कह रहा हूँ मैं...
बबली जी मैं बेशक भूत बोल रहा हूँ....!!

Shiv Kumar Mishra said...

सुन्दर भाव हैं. आप और अच्छा लिखें, यही कामना है.

purushottam said...

बहुत खूबसूरत

अविनाश वाचस्पति said...



ली

बली

की
शायरी
खूब
भली।