Wednesday, April 15, 2009


तन्हाइयों में तुमको ही याद करते हैं,
तुम सलामत रहो यही फरियाद करते हैं,
हम तुम्हारे ही मोहब्बत का इंतज़ार करते हैं,
तुम को क्या पता हम तुमको कितना प्यार करते हैं !

6 comments:

sujata said...

love should be expressed, its not a shame to love even if its not always socially permissible, true love is pure and hiding it is a sin

अभिन्न said...

bahut sundar blog hai aapka aur itni sundar sundar rachnayen padh kar man bada prasann hua hai,aap ko bahut bahut mubarakbaad,
true love and waitings....sooooooooooooooo long waitings yet a faith....
nice to read it
with regards

संदीप शर्मा said...

हम तुम्हारे ही मोहब्बत का इंतज़ार करते हैं,
तुम को क्या पता हम तुमको कितना प्यार करते हैं !

अच्छी भावनाएं है...

बहुत खूब....

मोहन वशिष्‍ठ said...

उर्मी जी आपकी बेहतरीन शायरी होती है। इसलिए रोजाना पढना आदत में शुमार हो गया है। अगर कोई शब्‍दों को पिराना सीखे तो आपसे बेहतरीन शेर लिखते हो बधाई स्‍वीकारें

प्रदीप मानोरिया said...

अत्यंत गंभीर भावः सूक्ष्म शब्द चयन सुन्दर प्रवाह लाज़बाब

purushottam said...

बेहतरीन