Thursday, May 14, 2009


मुददत हो गई है उन तन्हाइयों को गुज़रे,
अब भी इन आंखों में वो खामोशियाँ क्यों है?
तोड़ दिया जिसने मोहब्बत पर से यकीन मेरा,
अब भी वो प्यार के काबिल क्यूँ है?


17 comments:

Yogesh Verma Swapn said...

muhobbat gar muhobbat hai muhobbat hi rahegi
dooriyan ,tanhaaiyan aur gam sahegi
bhale kar de juda duniya,unhen phir yaad karke
krishna radha ki tarah ,pyaar bhi unko karegi

achcha likh rahi hain aap.

ARUNA said...

bas itna kahoongi..........waah babli waah!!!!!

जयंत - समर शेष said...

Kyaa baat hai..

sujata sengupta said...

Truly fantastic..how do you write so well and so frequently..it must be some kind of record!!

mark rai said...

अब भी इन आंखों में वो खामोशियाँ क्यों है?.....
nice picture....khamoshiyan to dikh hi jaati hai....

दिगम्बर नासवा said...

मुददत हो गई है उन तनहाइयों को गुज़रे,
अब भी इन आंखों में वो खामोशियाँ क्यों है?

बहूत ही गहरी बात..............पर अक्सर ऐसा होता है............तन्हाइयां अपना एहसास कराती रहती हैं.............किसी न किसी अंदाज़ से .......लाजवाब लिखा

Vikram Thakur said...

iska jawab to aaj tak kisi ke paas nahi hai. phir meri bisat hi kya hai

प्रसन्नवदन चतुर्वेदी 'अनघ' said...

मुददत हो गई है उन तनहाइयों को गुज़रे,
अब भी इन आंखों में वो खामोशियाँ क्यों है?
तोड़ दिया जिसने मोहब्बत पर से यकीन मेरा,
अब भी वो प्यार के काबिल क्यूँ है?
प्रेम और बेवफ़ाई से भरे भावों की सुन्दर अभिव्यक्ति...

Saiyed Faiz Hasnain said...

कहते है जब दिल टूटता है तो सिर्फ़ दिल ही नही ज़िन्दगी भी खामोश हो जाती है । अच्छी लगी ये पोस्ट बिल्कुल दिल के करीब थी ...............

अलीम आज़मी said...

kya kahne aapke urmi .....ji dil baag baag ho gaya

manu said...

खूबसूरत तस्वीर के साथ उम्दा ख्याल,,,,,,,

मुकेश कुमार तिवारी said...

उर्मी जी,

भाव भरी हुई बंदिश। आँखों में सिमटी हुई खामोशियाँ बहुत कुछ ख जाती हैं अनकहा भी।


मुकेश कुमार तिवारी

शोभना चौरे said...

amosshi hi bhut kuch kah jati hai.

RAJ SINH said...

चाहे खामोशियान या हो तन्हाइयान
प्यार मे चाहे हो कोयी रुस्वायियान
काब्लियत की कोयी मोहताज़ नहीन
प्यार की हद मे कोयी ना पाबन्दियान.

jamos jhalla said...

ishq ek aag kaa dariyaa hai
phir bhee doob kar jaate hai
ishq aatish hai jo lagne par
bujhaaye nahi bujhtee
phir bhee ishq ishq he ishq.

मोहन वशिष्‍ठ said...

बबली जी आपकी हर कविता में एक कशिश होती है जो अपनी तरफ खींच लाती है

निर्मला कपिला said...

इतना ही कहूँगी लाजवाब बधाई