Monday, June 29, 2009


ये
ज़िन्दगी जैसे एक सज़ा सी हो गई है,

गम के सागर में कुछ इस कदर खो गई है,
तुम जाओ अब वापस ये गुज़ारिश है मेरी,
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है!

38 comments:

Aparna said...

Very poignant. I love your short four line poetry.

ARUNA said...

wah wah in char panktiyon ne jaise jaadu kar diya.....adbhut shaayari hai!!

Murari Pareek said...

बहुत सुन्दर, बबली जी !!आप की पंक्तियाँ और आपका स्केच , और आप भी !!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

बबली जी।
कम शब्दों में
बहुत ऊँची बात कह देना
आपकी विषेशता है।
बेहतरीन शेर के लिए बधाई।

ताऊ रामपुरिया said...

वाह ..लाजवाब.

रामराम.

ओम आर्य said...

कभी कभी ऐसी आद्ते हो जाती है .........बहुत ही सुन्दर भाव सीधे दिल निकली हुई...............जहाँ सिर्फ प्यार की पुकार है................खुब्सूरत एहसास........अमोल

cartoonist anurag said...

शायद मुझे तुम्हारी kavitaon ki आदत सी हो गई है.....

babli ji bahut hi shandardar rachna hai....badhai...
aapki kalam yun hi sunder rachnayen karti rahe....

महामंत्री - तस्लीम said...

हमेशा की तरह शानदार।

-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

RAJ SINH said...

हमेशा की तरह , मनभावन ,

yuva said...

Gam-e-haal is dil ka na puchhiye
ki aadaton se teri
mera dam nikalta hai
vo kahenge bahut khoob
par aankhon men jab dekhiye
shabnam nikalta hai

दिगम्बर नासवा said...

ये aadat भी क्या bakaa है............. एक बार लग जाए तो choot ti नहीं है............ lajawaab sher हैं आपके

मोहन वशिष्‍ठ said...

wah ji bahut sunder very nice plz keep it up

sujata said...

Again such beautiful lines! I really admire you for writing so beautifully and that too almost everyday!!

Prem Farrukhabadi said...

aap sachmuch laajawaab hai. bahut achchha likha. badhai.

mark rai said...

tum aa jaao wapas ..abhi mujhe tumhaari aadat si ho gayi hai....wakai laajbaab likha hai...aur painting to use saarthak banaati hai......

राज भाटिय़ा said...

तुम आ जाओ अब वापस ये गुज़ारिश है मेरी,
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है!
बबली जी जबाब नही , बहुत सुंदर.
धन्यवाद

अमिताभ श्रीवास्तव said...

aadat to aap lagaa rahi he urmiji apne sh'ro se/ sh'ro ko padhhne ki/
achha likha he/ badhai/

Saiyed Faiz Hasnain said...

zindagi jab tak saza na de maza nahi aati........

satish kundan said...

तुम आ जाओ अब वापस ये गुज़ारिश है मेरी,
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है....किन शब्दों में आपकी प्रशंशा करूँ समझ में नहीं आता.......बहुत खुबसूरत पंक्तियाँ!!!!!!!!!

kavita said...

you are blessed by MA SARASWATI ji

SWAPN said...

ye aadat bala hai buri tum kya jaano
hamen hai tumhari zururat,tumna maano

rachna achchi lagi.

manu said...

शायद मुझे भी तुम्हारी आदत सी हो गयी है

M Verma said...

यह कमेंट आपकी शायरी के लिये :
"शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है!"
हर शब्द बोल रहे है. बोलने को बचा क्या है.

M Verma said...

यह कमेंट आपके sketch के लिये :
एहसास की हर लाईन
it is very fine

very beautiful

डॉ. मनोज मिश्र said...

सटीक एहसास का बोध करती हुई रचना ,बधाई .

cartoonist anurag said...

bablee kya bat hai....
mere cartoon ajkal achhe nahi ban rahe kya...
aap milne hi nahi aa rahi hai....
aapke intzar main mera ek aour cartoon......

मुकेश कुमार तिवारी said...

बबली जी,

खूबसूरत शेर लाजवाब भाव कि किसी हमदम का आदत हो जाना।

सादर,

मुकेश कुमार तिवारी

kumar Dheeraj said...

आप जो लिखती है वह वाकई दिल पे आ जाता है । इस वार का शैर भी उतना ही लाजबाब है । लगता है मानो अपने साथ सच ही घटित हो रहा हो । सुन्दर लिखती है शुक्रिया

Dhiraj Shah said...

आज गम था इतना सीने मे की
उसका गम भी भुल गया
पर यादे कम्बख्त न जीने देती है न मरने

Abhishek Mishra said...

Vakai sundar panktiyan.

Pradip Biswas said...

Samay Boye jai
Jibon chai na ta
Pichhu Phire Chai
Jani abar phire ashbe na
Tobu jadi tumi Aasho
Jhara Smiritir patai
Shabder gaan tule.

cartoonist anurag said...

तुम आ जाओ अब वापस ये गुज़ारिश है मेरी,
शायद मुझे तुम्हारी आदत सी हो गई है!


babli ji naya cartoon dal diya hai.....jaroor dekhiyega....

GAURAV said...

behtareen sher

manohar pal said...

vakai aapane in chand paktiyon me kaphi-kuch kah diya hai. aapane ye line mere dil ko chho gaye.
very good and thanks

ओम आर्य said...

aap thode se hi dil ki baat ko samet lete ho ...........bhawanao me dubo dete ho

JHAROKHA said...

vah bahut bdhiya evam bhavanatmak abhivyakti---
Poonam

Dimps said...

Very beautiful
Regards,
Dimple
http://poemshub.blogspot.com/

'अदा' said...

hnm
शायद मुझे भी तुम्हारी आदत सी हो गयी है
abhut khoobsurat khayal...
accha laga padh kar...