Tuesday, August 25, 2009


अश्कों को हमने कई बार रोका,

फिर भी जाने क्यूँ आँखें धोखा दे गई,
भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर,
उनका ज़िक्र आते ही जाने क्यूँ पलके नम हो गई !!

60 comments:

अजय कुमार झा said...

इन आखों का क्या ऐतबार करें,
इनका काम ही धोखा , देना और खाना है,
आंसूओं पर कब, किसका ज़ोर चला,
इन्होंने, भी कहां, किसी का कहना माना है....

Nirmla Kapila said...

बबली बहुत सुन्दर लिखा है बधाई

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

bahut behatreen. aansoo ki boond par aapne bahut kuchh kah diya.
badhai.
urmi ji!

समयचक्र said...

रचना दिल को छू गई बहुत खूब बबली जी धन्यवाद

विनोद कुमार पांडेय said...

सुंदर भाव...सुंदर पंक्तियाँ
बधाई..

Pankaj Mishra said...

बहूत खूब बबली जी गजब की रचना

Pankaj

Mithilesh dubey said...

लाजवाब बबली जी, और क्या कहें आपकी रचना तो गजब ठाती है। बहुत सुन्दर रचना बधाई।

RAJIV MAHESHWARI said...

आज तो गजब कर दिया है........

मस्तानों का महक़मा said...

simat gaya tha aasma bahane ko aasu mere liye..
me gam me tha uske jo ro raha tha mere liye
idhar udhar se usne hatho se uthaya aasuooo ko
me dhoond raha tha use jo bilak raha tha mere liye.

श्यामल सुमन said...

अच्छे भाव की पंक्तियाँ बबली जी।

मिलन में नैन सजल होते हैं विरह में जलती आग।
पि्रयतम प्रेम है दीपक राग।।

मस्तानों का महक़मा said...

bahut hi achcha likha hai...
wo feeling nazar aati hai.

Hobo ........ ........ ........ said...
This comment has been removed by the author.
Hobo ........ ........ ........ said...

kash tumhari aankhon ne hamari aankhon ko is haal mein dekha hota,
tum suno na suno magar ankhein ankhon ka aitbar karti hai itna bharosa aaj bhi hai...

yuva said...

yaad se to aankhen nam hai
par yaad raha unko
yahee kya kam hai

शिवम् मिश्रा said...

"अश्कों को हमने कई बार रोका,
फिर भी न जाने क्यूँ आँखें धोखा दे गई,
भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर,
उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई !!"


बढ़िया लिखा, लगी रहिये |
शुभकामनाये |

vandana said...

bahut khoobsoorat ahsaas.

VisH said...

hummmmm bahut khoob u hve such a wonderful thought keep going....

खुशदीप सहगल said...

नम आंखों की कशिश दूर तलक जाएगी.मेरे ब्लॉग पर हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया. उम्मीद करता हूँ, आगे भी ऐसी नज़रे-इनायत मिलती रहेगी

नीरज गोस्वामी said...

मुझे आपकी इस रचना को पढ़ कर एक पुराना शेर याद आ गया:
आया ही था ख्याल की आँखें छलक पढीं
आंसू किसी की याद से कितने करीब थे

नीरज

vikram7 said...

अश्कों को हमने कई बार रोका,
फिर भी न जाने क्यूँ आँखें धोखा दे गई,
भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर,
उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई
बहुत खूब

Saiyed Faiz Hasnain said...

ashko ki baat dil se hokar aati hai ye aap ne bakhoobi bataya hai.........sunder post

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत खूबसूरत लिखा. शुभकामनाएं.

रामराम.

KNKAYASTHA "नीरज" said...

बबलीजी,
बहुत ही सुन्दर बातें...
अब अपनी रचनाओं को थोडा विस्तार दें...
आप तो लगता है, बहुत कुछ हम लोगों के सोचने-विचारने के लिए छोड़ देती हैं...

Umesh Agarwal said...

great shayari..keep writing :)

sujata said...

lovely lines once again. You should come out witha book on verses now..you have so many beautiful poems here.

kshama said...

बबली ..बेहद सुंदर !..लगा जैसे मेरे मनके भावों को आपने ज़ुबाँ दी हो ..!

रश्मि प्रभा... said...

bahut badhiyaa

ओम आर्य said...

यह दर्द हर एक आदमी भोगत ही है .....पर आपबहुत ही खुब्सूरती से दर्द को आवाज दे देती है .......बहुत बहुत बधाई

गर्दूं-गाफिल said...

सुंदर भावः संजोये अभिव्यक्ती के लिए बधाई

कविता said...

Bahut badhiya.
Think Scientific Act Scientific

Dhiraj Shah said...

इक दिन गुल ने पुछा गुलशन से
बता ये गुलशन तेरे आंखो मे अश्क क्यो
तो उसने कहा , जमाने की नजर लग गयी

JHAROKHA said...

भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर,
उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई !!
apkee rachnayen padhkar jo shabd nikalta hai...sirf vah ..vah ...aur sirf vah.
Poonam

BK Chowla said...

As usual beautifully written lines.

mehek said...

bahut khub,ye ashq bhi beh jate hai bas....

अर्चना तिवारी said...

बहुत सुन्दर रचना...दिल को छू गई..

Harsh said...

bahut sundar

AlbelaKhatri.com said...

वाह !
वाह !
वाह !
____________क्या बात है !

आँसू का इक क़तरा भी शबनम हो जाएगा ..........
आप गर मुस्कुरादो तो मरहम हो जाएगा ..........
____
_____बधाई ! बहुत उम्दा शायरी !

योगेश स्वप्न said...

hota hai, hota hai aisa bhi hota hai. chhota teer ghav gambheer.

Amit414@IT-BHU said...

it's so mesmerizing :)

so touching...:)

cheers!!

प्रवीण शाह said...

बबली जी,
ऐसा सभी के साथ हो जाता है कभी कभी कि न चाहते हुए भी आंखें नम हो जायें...
पूरी शिद्दत से पकड़ा इस अहसास को आपने।
THUMBS UP!

चंदन कुमार झा said...

बहुत सुन्दर भाव. आभार.

kavita said...

I agree with Sujata..you must write a book.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

babli ji....
har bar ki tarah is baar bhi aapne dil khush kar diya apni rachna se..

Sheena said...

wo kaun se ehsaas the jo mere sang reh rahe the,
kaun se dard ab bhi baki the jo ashq ban kar beh rahe the...

-Sheena

aleem azmi said...

kya kahne aapke bahut....behtareen

Imagination said...

Kya baat ...bahut khoob....

Bin bulaye bewaqat aa jaana hi hai ansuon ka kaam

Har lamhe ko ji jana har ashk ko pee jana hai Zindagi ka naam

Apke sher padte padte hum bhi shayarana hogaye

Sumandebray said...

bahut behatreen...


Tum mujhe bhool bhi jaao to yeh haaq hai tumko
Meri baat aur hai Maine to mohabbat ki hai………….

shilpa said...

this you wriiten close to my heart just something hap recently before so this poem touched me

Dr. shyam gupta said...

दुख में झरते,सुख में झरते,नयनों के कष्टों में झरते’
मन-वाणी को मुखरित करते,मन की मौन कहानी है।
कोई कहता आंसूं हैं ये,कोई कहता पानी है।
मन की कसक सुहानी है,मगन ह्रिदय की वाणी है।

M.A.Sharma "सेहर" said...

Wah !!
Kya shayari karti ho..

Interesting !!

Matt said...

shayari achha hain:p despite not speaking hindi too well i cud understand it..!

cheers..

Dr.Aditya Kumar said...

'वियोगी होगा पहला कवि' यह पढ़ा था , आपकी शायरी पढ़ कर लगता है कि शायर परमानेंट वियोगी है. कुछ आनंददायी,सामयिक एवं प्रेरक साहित्य भी लिखिए. आपमें प्रतिभा है.

satish kundan said...

आँखें नम कर गई आपकी रचना....इस खुबसूरत रचना के लिए बहुत बहुत बधाई

apnesapne said...

bahut dard likh diya hai.. but gr8

hem pandey said...

'उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई !!'
- उनका ख्याल ही ऐसा होता है.

Dr. Kiran Dangwal said...

Dear Babli
bahut achhi shyeriya hai but sab dard se sarbor hai.....pyar main aisa hi hota hai jisse pyar hota hai.wahi aahu aur dard deta hai. see my blog.kldangwal.blogspot.com

creativekona said...

भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर,
उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई !!
Har bar kee tarah is bar bhee lajavab .post.
HemantKumar

Dr. Kiran Dangwal said...

great shayari with full of emotions

दिगम्बर नासवा said...

उनका ज़िक्र आते ही न जाने क्यूँ पलके नम हो गई

सच कहा .......... पर इन आंसूओं पर किसका ज़ोर है ............

KNKAYASTHA "नीरज" said...

भरोसा तो था हमें अपने आप पर मगर...


इतने दर्दीले और नाजुक तरीके से आपने "मगर" कह दिया...