Thursday, September 3, 2009


मिलने की खुशी बिछड़ने का गम,
तन्हा उदास है हम,
कैसे कहें कैसे हैं हम,
बस यूँ समझ लो बहुत अकेले हैं हम !

52 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

खुशी हमसे रूठी. बिछुड़ने का गम है।
मगर दिल-जिगर में, अभी जोश-दम है।

बहुत खूब, शायरी है।
बधाई!

प्रसन्न वदन चतुर्वेदी said...

प्रेम भरे भावों की सुन्दर प्रस्तुति...
अच्छी प्रस्तुति....बहुत बहुत बधाई...

वाणी गीत said...

कभी कभी बिना गम और ख़ुशी के रहना ...तन्हा रहना...भी अच्छा लगता है ..
ये तन्हाई कुछ और बढ़िया शेर ले कर आये ..बहुत शुभकामनायें..!!

Udan Tashtari said...

क्या बात है..बेहतरीन!!

ताऊ रामपुरिया said...

वाह बहुत लाजवाब.

रामराम.

mehek said...

कैसे कहें कैसे हैं हम,
बस यूँ समझ लो बहुत अकेले हैं हम !
waah lajawab

M VERMA said...

जज्बात आपके आपके साथ है
इन्हे साथी बना लीजिए
कभी खुद को सुनिये
तो कभी खुद की सुना लीजिये

creativekona said...

Bahut khoobsoorat sher .....kam shabdon men akelepan ko abhivyakt kiya hai.

Hemant Kumar

Dr. Amarjeet Kaunke said...

sher v bahut khubsurat aur tasveer bhi.....

खुशदीप सहगल said...

छोटी सी ये दुनिया,
पहचाने रास्ते हैं.
तुम कभी तो मिलोगे,
कहीं तो मिलोगे,तो पूछेंगे हाल.

विनोद कुमार पांडेय said...

चार लाइनें पर बेहतरीन भाव..बधाई!!!

Mithilesh dubey said...

वाह बबली जी बहुत खुब ।

Murari Pareek said...

ऐसा अकेला पन बहुत खूब ! अति सुन्दर !!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

babli ji,
kamal kar ditta tussi....

KNKAYASTHA "नीरज" said...

बहुत ही अच्छी बातें...

kitni sadgi se aapne ulahna bhi de diya...wah!

राज भाटिय़ा said...

अजी जेसे भी रहो खुश रहो, कभी कभी हम भीड मै रह कर, अपनो मै रह कर ओर भी तन्हा हो जाते है.
आप ने बहुत सुंदर लिखा
धन्यवाद

Saiyed Faiz Hasnain said...

कैसे कहे कैसे है हम .....वह बबली जी सुंदर पोस्ट

satish kundan said...

बबली जी आप कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाती है...मैं तो कायल हो गया आपकी लेखनी का..मैंने एक नै पोस्ट डाली है आपका स्वागत है..

vikram7 said...

मिलने की खुशी न बिछड़ने का गम,
न तन्हा न उदास है हम,
कैसे कहें कैसे हैं हम,
बस यूँ समझ लो बहुत अकेले हैं हम
वाह....कम शब्दो बहुत कुछ कह देती हॆं,आप

Dr.T.S. Daral said...

पहली दो पंक्तियों में सात्विक विचारों की झलक नज़र आती है.

Prem Farrukhabadi said...

न मिलने की खुशी न बिछड़ने का गम,
न तन्हा है हम aur न उदास है हम,
aakhir कैसे कहें dost कैसे हैं हम,
बस यूँ समझ लो बहुत mast हैं हम

atisundar.Badhai!!

चंदन कुमार झा said...

बहुत सुन्दर ........लाजबाव.

Pradip Biswas said...

I am sometimes alone.
Stars and moon,
Sun and shadow,
Wind and breeze,
River and Pond
Follow me
Follow to that lonely dane
long before you came
Only in my mind's glasspane.

Pankaj Mishra said...

बहूत खूब बबली जी

sujata said...

Very good Urmi!! Pujo shopping started??

रश्मि प्रभा... said...

kis tarah akele ho tum
shabdon ko yun mayus na karo
we har pal tumhare andar umadte hain
saath hote hain

दिगम्बर नासवा said...

मिलने की खुशी न बिछड़ने का गम,
न तन्हा न उदास है हम,

LAJAWAAB LIKH HAI ...... SHAANDAAR NAZM HAI DIL KO CHOO KAR GUZAR GAYEE HAI ...

Atmaram Sharma said...

बहुत खूब. गागर में सागर इसी को कहते है.

shama said...

Naa milneka gam na ho..naa bichhadne ka dukh ho..yahee dua detee hun!

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Hobo ........ ........ ........ said...

Kaun kehta hai akele ho tum,
Apne aap se baate karte ho tum...

Science Bloggers Association said...

बहुत खूब लिखा है आपने।
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

ओम आर्य said...

बिल्कुल सही लिखा है आपने............

कमलेश वर्मा said...

wah-wah kya bat hai , bahut khoob.

raj said...

न तन्हा न उदास है हम,...sahi kaha aapne..

योगेश स्वप्न said...

umda rachna, badhai.

R S V said...

wah wah kya baat hai!!
kaise kahen kaise hain hum...
kah bhi daalo
ye sama na phir aayega
akele ho abhi.. phir
shayad saans na le pao tum..

विनय ‘नज़र’ said...

सुन्दर

Dr.Aditya Kumar said...

भावों और चित्र का सुन्दर समन्वय ....बधाई

kavita said...

Wah Babli..i wonder how everytime you come up with such excellent posts.

mark rai said...

कैसे कहें कैसे हैं हम,
बस यूँ समझ लो बहुत अकेले हैं हम !.....
very nice...

Matt said...

nyce post.. really wish I was so fluent in hindi :(
I also hope that what u have written about isn't what ur going through :(

Pramod Kumar Kush 'tanha' said...

Behad saadgii se bharii bhaavpurn abhivyakti ...

hem pandey said...

'बस यूँ समझ लो बहुत अकेले हैं हम !'
-एकला चलो रे.

JHAROKHA said...

Verya nice words...with full of feelings and imotions.
Poonam

सुलभ सतरंगी said...

वाह! बहुत खूब !!

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत बढ़िया बहुत बधाई .

भूतनाथ said...

are aapke paas to yha ek adbhut khajana hai....kitnaa bhi lutaayiye....khatm hi nahin hotaa..!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

Man ke bhaavon ki sundar abhivyakti.
-Zakir Ali ‘Rajnish’
{ Secretary-TSALIIM & SBAI }

डा. श्याम गुप्त said...

न तन्हा हैं...बाद में बहुत अकेले हैं हम; क्या विरोधाभास है; तन्हा व अकेले समानर्थक शब्द हैं।
---परन्तु तन्हा भावनात्मक अर्थार्थ में है,अकेले भौतिक अर्थार्थ में; यादें साथ हों तो अकेले होते हुए भी तनहाई नहीं रहती।
-----बहुत सुन्दर,गहन,लक्षणात्मक सहज़ अभिव्यक्ति।

डा. श्याम गुप्त said...

सखि री! तेरी कटि छीन,
पयोधर भार भला धरती हो कैसे!!

Anonymous said...

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Anonymous said...

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