Sunday, November 22, 2009


ये दिल उदास है, कोई पैगाम ही लिख दो,
तुम अपना नाम लिखो, मगर गुमनाम ही लिख दो,
सिर्फ़ विश्वास पर ही साँस टिकी है मेरी,
तुम मेरे नाम सिर्फ़ एक शाम ही लिख दो !

45 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

वाह बबली जी!
बहुत ही खूबसूरत शेर पेश किया है आपने!
आपकी लेखनी में निखार आता जा रहा है!
बधाई!

AlbelaKhatri.com said...

samhal ke rahna babliji !

is kadar maasoomiyat se kahoge to log

nam kya paigaam likh denge

ek shaam kya

zindgi ka har lamha aapke naam likh denge

___abhinandan is komal kavita ke liye

मनोज कुमार said...

इस रचना ने मन मोह लिया।

Dr.Aditya Kumar said...

क्या बात है ?.....चंद लाइनों में बहुत कुछ कह दिया.

Mithilesh dubey said...

बहुत खूब , लाजवाब रही आपकी हर लाईनें ।

राज भाटिय़ा said...

ये दिल उदास है, कोई पैगाम ही लिख दो,
तुम अपना नाम न लिखो, मगर गुमनाम ही लिख दो,
बबली जी बहुत सुंदर हमेशा की तरह
धन्यवाद

Udan Tashtari said...

बढ़िया है...लिखती चलो!!

Apanatva said...

ek hamesha kee tarah chotee see par pyaree rachana.

शरद कोकास said...

दिल उदास है,कोई पैगाम ही लिख दो,
नाम न लिखो गुमनाम ही लिख दो,
सिर्फ़ विश्वास पर साँस टिकी है मेरी,
मेरे नाम सिर्फ़ एक शाम ही लिख दो !

babalee jee Don'Mind I have given a shape to your poetry

वन्दना said...

bahut hi sundar bhavon se labrej sher hai..........thode mein hi sab kah diya...........lajawaab

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

shaam kya aap kaho to poora din he likh dein...
bahut he badhiya babli ji...

नीरज गोस्वामी said...

बहुत भाव पूर्ण रचना...बधाई...
नीरज

BK Chowla said...

Babliji,What can I say about such beautifully written poem.

मस्तानों का महक़मा said...

बहुत बढ़िया...
पढ़कर अच्छा लगा, चार लाइनों मे किसी ख्याल को रख पाने की अदा, बहुत खूब।

sada said...

बहुत ही खूबसूरत पंक्तियां लाजवाब प्रस्‍तुति ।

Sumandebray said...

wah! sirf ek sham hi likh do!!
Bahut bariya

अजय कुमार said...

मिलन की तड़प महसूस कराती रचना, बधाई

mark rai said...

ye taswir kaphi achchi hai....isake ander aisa lagta hai ki sare sansaar ka karuna bhara hua hai....

Unseen Rajasthan said...

Very nicely written !! Beautiful words !!

समयचक्र - said...

बहुत खूब आपकी कलम का जबाब नहीं . कम शब्दों में अच्छी प्रस्तुति . बबली जी धन्यवाद.

jamos jhalla said...

paigaam kayaa mere neem apni ek saans hi likh do.

दिगम्बर नासवा said...

खूबसूरत शेर ....... हमेशा की तरह सुंदर ....

Rekhaa Prahalad said...

Umda rachana!

खुला सांड said...

बहुत अच्छी और ताज़ा खिलाई बबली जी दिल बाग़ बाग़ हो गया !! सांड के लिए बेहतर चारा !!!

इश्क-प्रीत-love said...

बेहद रूमानी ख़याल है बबली जी शुक्रिया

Murari Pareek said...

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ye aapke liye babliji is sunda si post pe

Devendra said...

शाम तो चुरानी पड़ती है
कोई लिखता-विखता नहीं
जैसे इस शायर ने चुराई-
तुम्हारे शहर का मौसम बड़ा सुहाना लगे
मैं एक शाम चुरा लूँ अगर बुरा न लगे
हा. हा.हा...
बहुत अच्छा शेर है मैं जवाब ढूँढता रह गया...बधाई

श्यामल सुमन said...

साँस टिकी है विश्वासों पर नाम भले गुमनाम।
बबली की इस रचना का अच्छा है पैगाम।।

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

Devendra said...

यह एक पुरानी परमपरा है कि जब कोई शायरी अच्छी लगती है
तो उसका जावाब भी शायरी से ही देने का मन करता है
कभी-कभी आदमी का मन मजाक करने का भी होता है
आपकी शायरी अच्छी न होती तो इतना दिमाग लगाने की क्या आवश्यकता थी
आपको मेरा जवाब अच्छा न लगा इसका मुझे खेद है

हरिओम दास अरुण said...

वाह ! बहुत खूब, बबली जी.
क्या लिखा है आपने! सौम्य और सरल शब्दों में जिस तरह आपने अपनी भावनाओं को अपने ब्लॉग पर उतारा है, सराहनीय है. सधन्यवाद.

neha said...

बहुत ही खूबसूरत........लाजवाब

अलीम आज़मी said...

pehle aapki comments se hume likhne ki hausala afzai ke shukriya aap bahut sunder likhti hai aur paintings se uski khoobsurti ko aur chaar chand laga deti hai ....kuch na kuch naya dekhne ko mil jaata hai aapki shairi me ....bas dua hai aise hi likhte rahiye .....
aleem

MUFLIS said...

panktiyaaN gin`ne meiN chaahe chaar haiN...lekin bhaav an-ginat,, beshumaar haiN inmeiN .
abhivaadan .

क्रिएटिव मंच said...

ये दिल उदास है, कोई पैगाम ही लिख दो,
तुम अपना नाम न लिखो, मगर गुमनाम ही लिख दो,


बहुत ही खूबसूरत शेर
लाजवाब
बधाई
एवं शुभ कामनाएं


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शहरोज़ said...

शुभ अभिवादन! दिनों बाद अंतरजाल पर! न जाने क्या लिख डाला आप ने! सुभान अल्लाह! खूब लेखन है आपका अंदाज़ भी निराल.खूब लिखिए. खूब पढ़िए!

ज्योति सिंह said...

ये दिल उदास है, कोई पैगाम ही लिख दो,
तुम अपना नाम न लिखो, मगर गुमनाम ही लिख दो
bahut hi achchhi rachna

Harsh said...

bahut sundar uttam.......

Umesh Agarwal said...

nice one :)

Rakesh said...

baliji
bahut acha..wah,,,umdaa she'r hai
tum mere naam ek shaam hi likh do.....pyar ki siddhat yaha charam avastha per hai...wah

kavita said...

Very beautifully expressed ....hugs Babli.

संतोष कुमार said...

वाह वाह वाह वाह क्या बात है !

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

बहुत खूब... वाह...

अनुपमा पाठक said...

बहुत खूब!

Mamta Bajpai said...

वाह , बबली जी बहुत खूब अच्छी शायरी
एक शाम ही क्यों ,हरपल आपके नाम कर दूँ

अच्छी रचना के लिए बधाई

सागर said...

bhaut hi acchi....