Saturday, February 20, 2010


ज़ख्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें,
ख़ुद निशाना बन गए वार क्या करें,
जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें,
इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें !

47 comments:

Mithilesh dubey said...

वाह , बहुत खूब ।

दीपक 'मशाल' said...

Aaj waqai aapne tareef ke kabil likha hai.. warna main jhoothi tareef me yakeen nahin karta..

BIRENDRA said...

Adbhut!!
Poetry likhne ka adbhut talent hai aapke paas. Itne gahre bhaav liye huye poetry likhna bahut badi baat hai.Ap ne apne poem ka koi sangrah abhi tak publish kiya ya nahin?

परमजीत सिहँ बाली said...

वाह!! बहुत बढ़िया मुक्तक है।बधाई स्वीकारें।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर, चार लाईनो मै सब कुछ कह दिया.
धन्यवाद

अजय कुमार said...

हमेशा की तरह शानदार , बधाई

पी.सी.गोदियाल "परचेत" said...

bahut Badhiyaa raha yah sher babli ji !

ताऊ रामपुरिया said...

सुंदर

रामराम.

M VERMA said...

यकीनन बहुत गहराई से इंतजार का इज़हार है
सुन्दर

shama said...

Wah,Babli!

kshama said...

Bahut sundar!

Dimple said...

Kya khoob kahi.....
Very nice!

Regards,
Dimps

Dev said...

बहेतरीन रचना ...

डॉ. मनोज मिश्र said...

जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें,
इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें !
बहुत सुंदर ,इस पर एक मशहूर शेर भी है.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

awesome//

Akhilesh pal blog said...

bahoot khoob aap ke sayaree ke sath chitr ka pradarasan ati sundar hai

Khushdeep Sehgal said...

हम इंतज़ार करेंगे, कयामत तक,
खुदा करे कि कयामत हो, और तू आए...

जय हिंद...

डॉ. महफूज़ अली (Dr. Mahfooz Ali) said...

बहत गहराई लिए हुए.... बहत सुंदर रचना....

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह....बहुत गहरे भावों को समेटा है....

Pt. D.K. Sharma "Vatsa" said...

बहुत बढिया!!

डॉ टी एस दराल said...

बहुत खूब और चित्र भी गज़ब।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बबली जी आज तुमने इस ब्लॉग पर अब तक की सबसे बेहतरीन रचना लगाई है!
मुबारकवाद!

ARUNA said...

lajawaab hai yaa!

पूनम श्रीवास्तव said...

ज़ख्म इतने गहरे हैं इज़हार क्या करें,
ख़ुद निशाना बन गए वार क्या करें, bahut hi sundar aur lajavab panktiyan. Poonam

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बबली जी, आदाब
विरह का भाव...
और इस अंदाज में..
वाह.

daanish said...

mn mei jo bhi tha, sb kholaa
lafzoN meiN izhaar kayaa kareiN

रवि धवन said...

सच्चे प्रेम को शब्दों में क्या खूब पिरोया है आपने...बेहद सुंदर

मनोज कुमार said...

बेहतरीन। लाजवाब।

Arshad Ali said...

जख्म की गहराई का इज़हार न हो पाए
हमदम के इंतजार में जान चली जाए
ये तब हीं हो सकता है बबली दीदी
जब किसी को एकतरफा प्यार हो जाए.

मेरे इस सस्ते शेर के चक्कर में मत पड़ियेगा
आपने बहुत उम्दा लिखा है,पढ़ कर मै भी तीन पैसे का शायर बन गया ..हा हा हा

Randhir Singh Suman said...

nice

विनोद कुमार पांडेय said...

वाह...खूबसूरत अभिव्यक्ति...

Rahul Chauhan said...

wah! urmi ji kya khub likhte hai aap

दिगम्बर नासवा said...

जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें,
इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें ...

वाह ...... कमाल का लिखा है...
इंतेहा हो गयी इंतेज़ार की .......

संजय भास्‍कर said...

वाह , बहुत खूब ।

BK Chowla, said...

Bahut mazedar

अमिताभ श्रीवास्तव said...

इंतजार हो तो ऐसा। वैसे इंतजार पर कहते हैं कि- हर चीज लौट कर आती है अगर सिर्फ इंतजार करें।
बहरहाल, आपकी चार लाइनें कमाल की होती हैं।

CSK said...

इसे मैं नारी-उत्पीडन का मर्म समझूं या तड़पते आशिक दिल की दर्द-ऐ-दास्ताँ....वैसे यह कुछ भी हो दिल को चीर दीया है इसने....................
---चम्पक.

सदा said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द दिल को छू गये ।

ज्योति सिंह said...

जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें,
इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें
kya baat hai ,bahut khoob

Neeraj Kumar said...

जान चली गयी पर खुली रह गयी आँखें,
इससे ज़्यादा हम उनका इंतज़ार क्या करें !



जिंदगी हमेशा इतनी बुरी नहीं होती...आप कविताओं में इतनी उदास क्यों रहा करती हैं...यू तो हंसमुख और जिन्दादिली की बात करी हैं...

वैसे आपकी शब्द गहरे हैं और भावपूर्ण भी....

संजय भास्‍कर said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द दिल को छू गये ।

Umesh Agarwal said...

bahut bahut badhiya

रचना दीक्षित said...

देर से आने के लिए करबद्ध क्षमा चाहूगीं. बहुत लाजवाब

सम्वेदना के स्वर said...

আমাদের অনুরোধ
আমাদের ব্লগে এক বার ভিসিট করুন..
দলের শুভেচ্ছা ও প্রীতি জানায়..

Dr.R.Ramkumar said...

मुक्तक पढ़कर सकते में आ गए
तस्वीर देखी तो तस्वीर हो गए

anil gupta said...

bahut hi sundat rachana hai....

दीनदयाल शर्मा said...

वाह ! भई वाह ! क्या बात है. इन्तहां हो गई इन्तजार की....शुक्रिया..
www.http://deendayalsharma.blogspot.com
www.http://kavitakosh.org