Wednesday, May 12, 2010


एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
एक शाम जाती है तुम्हारी याद लेकर,
हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर !

53 comments:

sangeeta swarup said...

बहुत खूबसूरत सोच....

amritwani.com said...

wow

bahut khub

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

ये तो बहुत खूब कहा...

Udan Tashtari said...

बढ़िया है..जल्द इन्तजार पूरा हो!!



एक विनम्र अपील:

कृपया किसी के प्रति कोई गलत धारणा न बनायें.

शायद लेखक की कुछ मजबूरियाँ होंगी, उन्हें क्षमा करते हुए अपने आसपास इस वजह से उठ रहे विवादों को नजर अंदाज कर निस्वार्थ हिन्दी की सेवा करते रहें, यही समय की मांग है.

हिन्दी के प्रचार एवं प्रसार में आपका योगदान अनुकरणीय है, साधुवाद एवं अनेक शुभकामनाएँ.

-समीर लाल ’समीर’

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा !!


इन्तजारे सबा रहा बरसो ..............तब कहीं जा के एक ग़ज़ल लिखी जब तुझे सोचता रहा बरसो !!!

sanjukranti said...

bahut achcha lga. atyant saral tatha kam shabdo me.i think likhna ese hi chahiye jo dil ko chhu jaye.

मनोज कुमार said...

इंतज़ार सफ़ल होगा।

दिलीप said...

waah ishwar kare jis jis ki ye tamanna ho poori ho jaaye...

kshama said...

Zaroor aayegi aisi shaam!Aameen!

JHAROKHA said...

Wah! bauhthi khoobsurat
poonam

M VERMA said...

जरूर आयेगी वो शाम ..
बहुत सुन्दर
चित्र मनोहारी

Gourav Agrawal said...

खूबसूरत सोच....
.... बधाई

टाइम मशीन से यात्रा करने के लिए.... इस लिंक पर जाएँ :
http://my2010ideas.blogspot.com/2010/05/blog-post.html

महेन्द्र मिश्र said...

बहुत ही ख़ूबसूरत मनभावन ..रचना ....

Suman said...

nice

देवेश प्रताप said...

लाजवाब रचना ......

Deepak Shukla said...

Hi..

Tumhen yaad aati hai jiski,
Ek din wo bhi aayega..
Jis din tere sang raha wo..
Yaad nayi de jayega..

Dua humari sham wo aaye..
Priyatam ko tere ghar laaye..
'GULDASTA' ek tujhse paakar..
Tere hi sang wo muskaaye..

DEEPAK..

विनोद कुमार पांडेय said...

सुंदर अभिव्यक्ति....शेर बढ़िया लगे..धन्यवाद बबली जी

'उदय' said...

हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर !
......................उम्दा!!!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

यह त्रिबेणी छंद बहुत बढ़िया रहा!

BK Chowla, said...

you seem to have changed your profile picture

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

वाह बहुत सुन्दर रचना है !

chitra said...

Beautiful lines....

Dr.Ajeet said...

"सम्वेदना और शिल्प दोनो दमदार है.."

अच्छा लगा आपको पढकर...

डा.अजीत

www.shesh-fir.blogspot.com
www.monkvibes.blogspot.co

Mithilesh dubey said...

वाह बहुत सुन्दर रचना है !

P S Bhakuni (Paanu) said...

nice, very nice, sunder ,ati sunder,wah....bahut khooob,

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर,
एक शाम जाती है तुम्हारी याद लेकर,
हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर.....
बहुत ही खूबसूरत अंदाज़.

वन्दना said...

वाह्………क्या बात कह दी …………।बहुत ही सुन्दर्।

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर जी धन्यवाद

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

हमारी शुभकामनांए.

रचना दीक्षित said...

बहुत ही ख़ूबसूरत मनभावन रचना बहुत खूबसूरत सोच

राकेश कौशिक said...

"हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर!"
याद नाकाफी है?

दिगम्बर नासवा said...

उस शाम का इंतेज़ार तो सबको है ... बहुत खूब लिखा है ...

sanjeev kuralia said...

bahut lazabab racnayen hen aapki !dhanyavaad

RAJ SINH said...

बहुत सुन्दर भाव बबली और साथ ही सुन्दर चित्र !

AlbelaKhatri.com said...

badi qatilana shaayari karti hain aap.....

itna hi kahoonga ki waaaaaaaaaaah !

ढपो्रशंख said...

ज्ञानदत्त और अनूप की साजिश को बेनकाब करती यह पोस्ट पढिये।
'संभाल अपनी औरत को नहीं तो कह चौके में रह'

Dimps said...

Union hoga uss dinn :) wonderfully written!
Love is beautiful!

Regards,
Dimple

sidheshwer said...

अच्छी रचना !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

सबास बबली बिटिया!! छोटा छोटा बात में गहराई देखाई देता है..

Sumandebray said...

bhaut khub .. kya baat hai

हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर !

Razi Shahab said...

zaroor aayegi wo shaam ...achcha likhti hain aap

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

badhiya ji babli jii....

psingh said...

umda sher .....
abhar

arvind said...

हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर !
.......बहुत खूबसूरत सोच,बेहद उम्दा ,शुभकामनाएँ.

अजय कुमार said...

वो शाम कभी तो आयेगी

कविता रावत said...

Badiya prastuti...

hem pandey said...

हमको उस शाम का इंतज़ार है,
जो आए तुम्हें साथ लेकर !

R.Ramakrishnan said...

Hello Babliji

Bahut sundar.

Ram

sheetal said...

aayegi ek woh bhi shaam,jo layegi kisiko apne saath.
intezaar ki ghadi hogi khatm,jab phir hoga unka saath.

bahut khubsurat.

Saiyed Faiz Hasnain said...

wakai yaad aati hai uski wo aayegi shaam ke saath.........
sundar rachna har bar ki taraha

muskan said...

bahut khub...

अलीम आज़मी said...

aapke do line ki poetry ke to jawab nahi hai...kafi dino baad aapke kalam ko dekha jo bahut hi umda hai pahle se bhiiii
best regards
aleem azmi

knkayastha said...

बेहतरीन रचना... आशा और अभिलाषा से भरी हुई...