Wednesday, June 9, 2010


तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते हैं,
प्यार से नहीं रुसवाई से डरते हैं,
इक उलझन में रहता मेरा दिले नादां,
मिलन से नहीं जुदाई से डरते हैं !

36 comments:

amritwani.com said...

मिलने के बाद जुदाई से डरते हैं !


ab assa he jab tak pani me nahi utrenge tab tak terna nahi aayega


all the best

Shekhar Kumawat said...

bahut khub


तन्हाई से डरते हैं,


sahi kaha ap ne

पी.सी.गोदियाल said...

ख़ूबसूरत शेर !

sanu shukla said...

sundar sher..

kunwarji's said...

सुन्दर...

कुंवर जी,

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

जज्बातों को खूबसूरती से लिखा है...

sheetal said...

achha likha aapne.

Dimps said...

Hello Babli ji,

Bus hum sirf "darte" hain :)
Bahut achha likha hai!

Regards,
Dimple

वन्दना said...

kyaa baat kah di...........bahut khoob.

रश्मि प्रभा... said...

bhawpurn

kshama said...

पर मिलने के बाद जुदाई से डरते हैं !

Haan! Yah judayi badi bhayanak hoti hai..

शिवम् मिश्रा said...

बहुत बढ़िया !!

chitra said...

beautiful....Milne ke badh judhayi se darthen..

दिलीप said...

waah bahut khoob...

डॉ टी एस दराल said...

जुदाई से डरेंगे तो मिलेंगे कैसे ।
मुक्तक अच्छा है ।

Arvind Mishra said...

बेहतरीन !

अरुणेश मिश्र said...

याद रखने लायक ।
प्रशंसनीय ।

soulpleasing said...

plz be positive and think positive !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

बाह! इसके आगे कुछो कहना हमरे बस का बात नहीं है...बाह!!

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

Hello,
This composition of yours is one of your best ones so far!
Keep writing!
Cheers!

RAJNISH PARIHAR said...

बहुत बढ़िया !!सुन्दर...शेर !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक said...

मनोवेदना को आपने बहुत ही साफगोई से प्रस्तुत किया है!

रचना दीक्षित said...

vaah...vaah... vah!!!!!!

महफूज़ अली said...

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति...

sada said...

मिलने के बाद जुदाई से डरते हैं, खूबसूरत पंक्तियों के साथ अनुपम प्रस्‍तुति ।

anjana said...

बहुत बढ़िया ....

मेरा शनि अमावस्या पर लेख जरुर पढे।आप की प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा ....आभार
http://ruma-power.blogspot.com/

Sumandebray said...

bahut badiya

सुमित प्रताप सिंह said...

सुन्दर अभिव्यक्ति...

Mumukshh Ki Rachanain said...

बढ़िया अभिव्यक्ति........
दिल से निकली आवाज.......

हार्दिक बधाई....

चन्द्र मोहन गुप्त
जयपुर

डॉ० डंडा लखनवी said...

चित्र-संगत के साथ शृंगार रस की
अच्छी प्रस्तुति .....बधाई। इस मुक्तक
के तीसरी और चौथी पंक्ति के पदों को
निम्न रूप में रख देखें।
सद्भावी- डॉ० डंडा लखनवी
/////////////////////
भीड़ से नहीं तन्हाई से डरते हैं।
प्यार से नहीं रुसवाई से डरते हैं॥
इक उलझन में रहता मेरा दिले नादां-
मिलन से नहीं जुदाई से डरते हैं॥

/////////////////////////

Manoj Bharti said...

बहुत खूब लिखा है जी ।

Dr.Ajmal Khan said...

achhe jazbaat hai.....

ज्योति सिंह said...

sach hai ,bahut sundar .

muskan said...

तमन्ना से नहीं तन्हाई से डरते हैं,
प्यार से नहीं रुसवाई से डरते हैं,
इक उलझन में रहता मेरा दिले नादां,
मिलन से नहीं जुदाई से डरते हैं !

सुन्दर...
बहुत सुन्दर...
बहुत बहुत सुन्दर...

o my love said...

nice

sanjukranti said...

बहुत ही सुन्दर.... छोटी सी दिल छूने वाली रचना ... मुझे तो आपकी रचना का हमेशा इंतज़ार रहता है.....