Tuesday, September 21, 2010


चेहरे पे अश्कों की लकीर सी बन गयी,
जो चाहा था वो तकदीर सी बन गयी,
हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !

52 comments:

ओशो रजनीश said...

अच्छी पंक्तिया ........

यहाँ भी आये एवं कुछ कहे :-
समझे गायत्री मन्त्र का सही अर्थ

sheetal said...

Humne chalayie thi ret pe ungli,
gaur se dekha to unki tasveer ban gayi hain,
wah!kya likha hain aapne, sundar ati sundar.
aise hi khubsurat ehsaas zindagi ke chahe woh khushi ke ho ya udaasi ke hum tak pahuchate rahiye.

विरेन्द्र सिंह चौहान said...

बहुत ही उम्दा .....
बहुत ही ज़बरदस्त .
आभार

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..तस्वीर बनी ....सुन्दर

सुधीर said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी
बहुत खूब कहा आपने। बधाई।

http://sudhirraghav.blogspot.com/
हमने अपना लोक बसाया,
चारों ओर है अपनी माया।
माया का विस्तार है इतना,
स्वर्गलोक का सार न जितना।

महेन्द्र मिश्र said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी

बहुत ही उम्दा...

मनोज कुमार said...

आज तो कमाल लिख दिया, बबली जी। बहुत सुंदर अभिव्यक्ति। बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

देसिल बयना-गयी बात बहू के हाथ, करण समस्तीपुरी की लेखनी से, “मनोज” पर, पढिए!

ZEAL said...

बहुत ही उम्दा

रचना दीक्षित said...

बहुत खूब .. तस्वीर बन गयी
सुन्दर,अच्छी पंक्तिया

वन्दना said...

वाह जी वाह ………………॥बहुत ही सुन्दर्।

Sumandebray said...

Wah... bahut khub!


हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... अंजाने में भी उनका नाम निकलता है .... बहुत खूब ... लाजवाब ...

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

बहुत सुन्दर हैं चारों पंक्तियां.

chitra said...

Good , very good.

AlbelaKhatri.com said...

चेहरे पे आंसुओं की लकीर बना देती है

देखते ही देखते तक़दीर बना देती है

भई, कमाल करती हैं उँगलियाँ आपकी

साहिल की रेत पे भी तस्वीर बना देती है

________बहुत ख़ूब !

sada said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍द, बहुत कुछ कहती पंक्तियां ।

nivedita said...

Very sweet!

डॉ टी एस दराल said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !

वाह , वाह , ग़ज़ब !
बहुत सुन्दर ।

anjana said...

वाह जी वाह बहुत अच्छी पंक्तिया...

Happy Anant Chaturdashi
GANESH ki jyoti se noor miltahai
sbke dilon ko surur milta hai,
jobhi jaata hai GANESHA ke dwaar,
kuch na kuch zarror milta hai
“JAI SHREE GANESHA”

अजय कुमार said...

कमाल का शेर है

डॉ. नूतन गैरोला " अमृता " said...

tasweer bhi sundar aur likha bhi khoob..likhne se bani tasweer aur bhi sundar...

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर रचना, धन्यवाद

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत सुंदर.

रामराम.

JHAROKHA said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !
Behatreen panktiyan likhee hai apne Babli ji...hardik shubhkamnayen.

Udan Tashtari said...

वाह! बहुत खूब!

Pradip Biswas said...

khub bhalo laglo. tomar ei kobita ta mone koriye dey
SOKHI BHALOBASA KAARE KOI
SE KI SUDHU E JATNAMOY

mahendra verma said...

बेहतरीन शायरी..वाह.वाह..बहत खूब

हेमंत कुमार ♠ Hemant Kumar said...

आपकी रचनायें छोटी होते हुये भी बहुत प्रभावशाली हैं ।

हास्यफुहार said...

बहुत अच्छी पंक्तियां।

shikha varshney said...

वाह वाह वाह ..क्या खूब कहा है ..वाह.

महफूज़ अली said...

बहुत ही उम्दा ....

दीपक 'मशाल' said...

चेहरे पे अश्कों की लकीर सी बन गयी,
जो न चाहा था वो तकदीर सी बन गयी,
हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !

lokendra singh rajput said...

वह क्या कहने है....

SACCHAI said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !

....ufff ..lovely lines, sister aapne to kamal kar diya ..clasic .arey mai kya kahu ki kitani acchi panktiyan hai ye the best "

----- eksacchai { AAWAZ }

http://eksacchai.blogspot.com

der se aane ke liye maafi chahta hu

Arvind Mishra said...

बहुत बढियां ..जस्ट एक्सेलेंट... अब आप एक अजीम शायारा हो गयीं हैं ...भाव और शब्द एक दूसरे से परफेक्ट ब्लेंडिंग में हैं !

Rachna said...

wah, kya baat hai!

खबरों की दुनियाँ , भाग्योत्कर्ष said...

बहुत खूब फ़रमाया है आपने । अच्छा लगा । वाह ! वाह! कहे बिना नहीं मानेगा मन । शुभ कामनाएं ।

mridula pradhan said...

wah.very good.

M VERMA said...

बहुत सुन्दर तस्वीर बनी रेत पर ऊँगलियाँ चलाने से
वाह !

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

जब तस्वीर उनका है और पताभी है तो फिरतस्वीर में सवालिया निसान काहे???
मगर सायरी अच्छा है!!

डॉ. हरदीप संधु said...

बहुत सुन्दर भाव !!

Sonal said...

very nice...

निर्मला कपिला said...

लाजवाब पँक्तियाँ। बधाई।

Apanatva said...

sunder ....ehsaas.

अशोक बजाज said...

चंद लब्जों में बेहतरीन प्रस्तुति .

Anand Rathore said...

achcha hai...

गिरीश बिल्लोरे said...

हमने तो चलायी थी रेत पे ऊँगली,
गौर से देखा तो उनकी तस्वीर सी बन गयी !
वाह वाह वाह

Rahul Singh said...

रेखाएं तो सवालिया हैं, वक्र भी, आपकी दृष्टि है जो लय बिठा लेती है.

Dorothy said...

बेहद खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

Manish said...

अच्छी लाइने!..

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बहुत ही बढ़िया।

सादर

वीना said...

बहुत बढ़िया...