Monday, October 11, 2010


जाने ये रात इतनी तन्हा क्यूँ है,
हमें अपनी किस्मत से शिकायत क्यूँ है,
अजीब खेल खेला है किस्मत ने,
आख़िर हमें उसीसे मोहब्बत क्यूँ है?

39 comments:

मनोज कुमार said...

लाजवाब। क़िस्मत का खेल ही न्यारा होता है!

AlbelaKhatri.com said...

tanhaai ki koi shikaayat

nahin honi chaahiye...


bala ki khoobsoorat hain aap ..

kya aapse kisi ko mohabbat

nahin honi chaahiye ?

______

____________

_______bhai ye toh baat

PASAND NAHIN AAYI

ha ha ha ha ha

संजय भास्कर said...

बेहद ख़ूबसूरत और उम्दा

सम्वेदना के स्वर said...

रातों की तन्हाई को चाँद तारों से बाँटो,
किस्मत की शिकायत को दूर भगाओ,
किस्मत के खेल तो होते ही हैं निराले,
बस उसकी मोहब्बत में गुम हो जाओ.
बहुत सुंदर बबली जी!

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत सुन्दर मुक्तक है!
--
किस्मत के खेल निराले...!

Arvind Mishra said...

बढियां है

डॉ टी एस दराल said...

सचमुच किस्मत के खेल निराले हैं । सुन्दर रचना ।

Arshad Ali said...

मुहब्बत में क्यों की जगह कहा होती..
ये तो ऐसी बला है..जो बिना क्यों कैसे के न जाने कैसे हो जाती है.फिर शिकायत तन्हाई की या दुहाई किस्मत की देते रहिये..मुहब्बत अपना गुल खिलाते रहती है.

अगेन उम्दा पोस्ट.

kshama said...

आख़िर हमें उसीसे मोहब्बत क्यूँ है?

Kabhi kisi ko mila hai is sawaal ka jawaab? Waise sawal prastut badee hee sundarta se kiya hai!

मोहन वशिष्‍ठ 9991428447 said...

bahut sahi likha urmi ji behatrin

lokendra singh rajput said...

bahut hi sundar ser.......

BK Chowla, said...

Good to start a day with your poem

Akanksha~आकांक्षा said...

बहुत उम्दा भाव...बधाई.

chitra said...

Kismat, we blame it we like it. Life is a puzzle. Good one Babli.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

खूबसूरती से लिखे जज़्बात

P S Bhakuni (Paanu) said...

न जाने ये रात इतनी तन्हा क्यूँ है,
हमें अपनी किस्मत से शिकायत क्यूँ है,
niceeeeeeeeeee.

जयकृष्ण राय तुषार said...

behad sundar

दिगम्बर नासवा said...

अजीब खेल खेला है किस्मत ने,
आख़िर हमें उसीसे मोहब्बत क्यूँ है

बस इतना बताना ही सबसे मुश्किल काम है ... अच्छा लिखा है ...

Tarkeshwar Giri said...

Ye Rat aur Khel dono ek jaise hi hain

Bikramjit said...

:) exactly my sentiments

bhagwaaan bhi kabhi kabhi acha khel khelte hain hamare saath



Bikram's

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको,
मेरी बात और है, मैंने तो मोहब्बत की है!

मनोज भारती said...

मोहब्बत पूछ कर नहीं की जाती

विनोद कुमार पांडेय said...

बहुत सुंदर..बढ़िया शेर...बधाई

ZEAL said...

Lovely lines to ponder on...

रचना दीक्षित said...

सुन्दर रचना ...बधाई

Akshita (Pakhi) said...

बहुत प्यारी ग़ज़ल....अच्छी लगी.


____________________
'पाखी की दुनिया' के 100 पोस्ट पूरे ..ये मारा शतक !!

Susmita Biswas said...

সখী ভালোবাসা কারে কয়
সেকি শুধুই যাতনাময়

ভালোবাসা বোধহয় জ্বর হওয়ার মতো | আসলে আমাদের মনের মধ্যে কোথাও জানিনা একটা চুম্বক লাগানো আছে | যাকে চাই সে এসে দাড়ায় অলক্ষে |
খুব ভালো লাগে তোমার কবিতা পড়তে তবে সময় লাগে বুঝতে হিন্দি ভাষা ভারী দুর্বল আমার |
এবার তোমার রান্নার ব্লগে যাই, দেখি মেয়ে আমাদের কি রেধেছে | তোমার কাকু এবার লেখা চালু করছে আমি আরো কিছু কবিতা লিখেছি আমার ব্লগে পড়তে পারো সময় পেলে|
পুজোর আশিস নিও তুমি আর্ সঞ্জয়

देवेन्द्र पाण्डेय said...

बहुत खूब.

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह भई बबली जी बल्ले बल्ले

sheetal said...

Din to kher kaise bhi nikal jaata hain, sare jazbaat raat ki tanhai main to dil main umda karte hain aur phir hum yahi socha karte hain.
NA JAANE RAAT ITNI TANHA KYUN HAIN,
HAME APNI KISMAT SE SHIKAYAT KYUN HAIN,
AJEEB KHEL KHELA HAIN KISMAT NE,
AAKHIR HAME USI SE MOHABBAT KYUN HAIN?
bahut sundar likha aapne.

JHAROKHA said...

bahut hi sundar abhvyakti.kismat to bar bar apnarang badalta rahta hia tabhi to lakh use kosne ke baad bhi hame usi se samjhouta karna padta hai
bahut hi khoobsurat sher-------
poonam

अमिताभ श्रीवास्तव said...

वाह, बहुत खूब। सवाल उठाती पंक्तियों में मीठे दर्द का अहसास भी है।

KK Yadava said...

बेहद संजीदगी से लिखा आपने...बधाई.



________________
'शब्द-सृजन की ओर' पर आज निराला जी की पुण्यतिथि पर स्मरण.

डॉ. हरदीप संधु said...

खूबसूरत रचना के लिए बधाई !

Chinmayee said...

विजय दशमी की शुभकामनायें !

_____________________
मेरा जन्मदिवस - २ (My Birthday II)

VIJAY KUMAR VERMA said...

अजीब खेल खेला है किस्मत ने,
आख़िर हमें उसीसे मोहब्बत क्यूँ है
bahut hee khoobsurat line ..dil ko chhoo gayi

sheetal said...

dussehra ki hardik subhkamnai.

Mumukshh Ki Rachanain said...

यही तो खेल है जहाँ शिकयत वहीँ मुहब्बत, जहाँ मुहब्बत वहीँ शिकायतें...........
सुन्दर रचना.....

हार्दिक आभार..........

चन्द्र मोहन गुप्त

पंकज मिश्रा said...

बहुत महत्वपूर्ण सवाल उठाया है आपने। हर कोई यही सवाल करता है पर जवाब किसी को नहीं मिलता।