Wednesday, March 9, 2011


ख़ामोश रात की पहलु में सितारे होते,
इन रूखी आँखों में रंगीन नज़ारे होते,
हम भी करते परवाह...
अगर आपसे बेपन्हा मोहब्बत करते !

35 comments:

सदा said...

वाह ...बहुत ही खूबसूरत शब्‍द ...।

mridula pradhan said...

bahut sundar pyari si.....baat...

रश्मि प्रभा... said...

waah...

Abhilash Pillai said...

wah ustad wah... maan gaye aapko aur aapki shaayri ko.. seen after a long time... what happen?

अलीम आज़मी said...

bahut umdaa likha hai aapne...

अमिताभ श्रीवास्तव said...

उफ्फ। बहुत बेहतरीन।

कई दिनों बाद आया, बहुत सी पोस्ट पढी। इन लगाई गई तस्वीरों ने काफी आकर्षित किया।

: केवल राम : said...

गजब बहुत दिनों बाद आपकी शायरी पढने का अवसर प्राप्त हुआ

arvind said...

ख़ामोश रात की पहलु में सितारे न होते,
इन रूखी आँखों में रंगीन नज़ारे न होते,
हम भी न करते परवाह...
अगर आपसे बेपन्हा मोहब्बत न करते !
....vah kyaa baat hai....bahut badhiya.

vijaymaudgill said...

shair ka khayal bahut accha hai par maffi chahta hu last line main sakta hai. means ki jo shair ka flow banana chahiye tha vo nahi bana.


ख़ामोश रात की पहलु में सितारे न होते,
इन रूखी आँखों में रंगीन नज़ारे न होते,
हम भी न करते परवाह...
agar aap hamari mohabat k sahare na hote.
ya fir
agar aap hamare rehbar, pyare na hote.
etc.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..

Sunil Kumar said...

दिल से निकला वाह , बहुत खूब

kshama said...

Bahut dinon baad likha hai,lekin bahut pyara-sa!

JAGDISH BALI said...

Beautiful words. May your love flourish!

Ankit said...

awesum !!!
I wish it was longer !!!
beautiful !!!

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सुंदर प्रस्तुति !!

lokendra singh rajput said...

सच है मोहब्बत परवाह करना सिखा देती है....
बहुत दिन से आपकी नई रचना का इंतजार था.....

SACCHAI said...

" bade lambe arse baad behatarin shayari "

badhai

-- http://eksacchai.blogspot.com/2011/03/blog-post_04.html

" kuch acche blog meri najar se "

is post ko padhiyega jaroor


---- eksacchai {AAWAZ }

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया!
आते ही कविता का चौका जड़ दिया!

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

वाह क्या बात है ... वापसी के लिए बधाई !

निर्मला कपिला said...

ारे बबली जी इतने दिन कहाँ रही/ बहुत दिन बाद देखा है। सुन्दर शायरी। बधाई।

Arshad Ali said...

मोहब्बत किया तो ज़िन्दगी से प्यार हो गया
बोली में एक मिठास,मन सितार हो गया
बे परवाह जीने का मज़ा किसे नहीं पसंद
एक प्यार हुआ "अरशद" कि गुनाहगार हो गया

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

ati sundar!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

बहुत खूब.
---------
पैरों तले जमीन खिसक जाए!
क्या इससे मर्दानगी कम हो जाती है ?

जयकृष्ण राय तुषार said...

मुझे खुशी हुई की अब आप फुरसत में हैं |बधाई और जोरदार दमदार वापसी के लिए बधाई और शुभकामनाएं

डॉ टी एस दराल said...

कई महीने बाद सुन्दर रचना के साथ वापसी पर स्वागत है ।

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

चार पंक्तियों में ही क्या कुछ कह दिया!
बहुत ही खूबसूरत !
आभार !

sheetal said...

Bahut lamba intezaar karvaya.
accha sher likha hain aapne.

ताऊ रामपुरिया said...

बहुत ही सुंदर, शुभकामनाएं.

रामराम.

संतोष पाण्डेय said...

क्या बात है. कम शब्दों में बहुत कुछ.

डॉ. हरदीप संधु said...

बहुत खूब ..
सुंदर प्रस्तुति !

रचना दीक्षित said...

आपने तो आते ही छक्का लगाके शुरुआत की है. बहुत ही उम्दा शेर. लाजवाब. पुनः आगमन पर बधाई.

ज्योति सिंह said...

bahut dino baad aana hua ,aapki khabar nahi mili abhi doosre blog par dekh chali aai .aur pyari rachna ko padhi

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

प्रिय उर्मि जी
सस्नेह अभिवादन !

अगर आपसे बेपनाह मोहब्बत न करते !
क्या बात है ! … अब फिर से लंबी छुट्टियों पर न जाएं … :)
आपकी याद में पूरे ब्लॉगजगत में वीरानी छा जाती है … :)

होली की अग्रिम शुभकामनाओं सहित
चंद रोज़ पहले आ'कर गए
विश्व महिला दिवस की हार्दिक बधाई !
शुभकामनाएं !!
मंगलकामनाएं !!!

♥मां पत्नी बेटी बहन;देवियां हैं,चरणों पर शीश धरो!♥


- राजेन्द्र स्वर्णकार

AREEBA said...

bahut umda shyriour usse bhi payari sooch bahut khub

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

होली के पर्व की अशेष मंगल कामनाएं। ईश्वर से यही कामना है कि यह पर्व आपके मन के अवगुणों को जला कर भस्म कर जाए और आपके जीवन में खुशियों के रंग बिखराए।
आइए इस शुभ अवसर पर वृक्षों को असामयिक मौत से बचाएं तथा अनजाने में होने वाले पाप से लोगों को अवगत कराएं।