Thursday, May 19, 2011


रहते हैं साथ साथ, मैं और मेरी तन्हाई,

करते हैं राज़ की बात, मैं और मेरी तन्हाई,
दिन गुज़र जाता है, लोगों की भीड़ में,
करते हैं बसर रात में, मैं और मेरी तन्हाई !

37 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत उम्दा शेर है!
कभी-कभी तो आप बहुत बढ़िया शेर कह जातीं हैं।
उनमें से यह भी एक है!

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा शेर ... बधाइयाँ !

Kunwar Kusumesh said...

मुझे तो तन्हाई बहुत पसंद है क्योंकि ऐसे में खूबसूरत और मीठी-मीठी यादें बहुत साथ देती है.
आपकी तन्हाई पर कविता लाजवाब है.

रश्मि प्रभा... said...

bhawbheeni panktiyaan

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सुन्दर अभिव्यक्ति तन्हाई कभी कभी भीड़ में भी मिला करती है

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

very nice jee

Dr (Miss) Sharad Singh said...

तन्हाई पर खूबसूरत शेर के लिए हार्दिक बधाई !

sheetal said...

chahe koi rahe na saath main.
chahe koi rahe na paas main.
tanhai ban kar ke saathi meri,
rehti hain sada mere aas-paas main.

Babli ji aapne ye sher khub hain likha.
ab to meri kalam se niklte hain shabd,wah wah wah.:)

anju choudhary..(anu) said...

मुझे से दूर हो कर भी
दिल के करीब है
मेरी तन्हाई

नूतन .. said...

दिन गुज़र जाता है, लोगों की भीड़ में,
करते हैं बसर रात में, मैं और मेरी तन्हाई !
वाह

रचना दीक्षित said...

करते हैं बसर रात में, मैं और मेरी तन्हाई !

बेहद उम्दा शेर. बधाइयाँ.

मनोज कुमार said...

सच्ची बात, और दिल की फ़िलिंग को जबान दे दिया है।

डॉ टी एस दराल said...

तन्हाई रास आ जाए तो आनंद ही आनंद है ।
खूबसूरत मुक्तक ।

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहद खूबसूरत शायरी!

सादर

सदा said...

बेहद खूबसूरत !

AlbelaKhatri.com said...

bahut umdaa shaayri...........

aapke liye badhaai zaroori hai

तन्हाई दिन में तो अक्सर हस लेती है
पर ये ज़हरी नागिन रात को डस लेती है
वस्ल फ़क़त देना ही जानता है इश्क़ में
जुदाई की रीत जुदा है, ये तो बस लेती है

सुमन'मीत' said...

waah ..bilkul sahi likha hai...

kshama said...

Bahut khoob Babli!

kavita said...

Beautiful as always.Have a happy weekend Babli :)

M VERMA said...

बिन बोले ये जो कहते है कहने दो
तन्हाई को भी तन्हा न रहने दो

अमित श्रीवास्तव said...

excellent...

mridula pradhan said...

bahut achchi lagi.

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Babli ji,bahut sunder prastutikaran ke saath hi hriday sparshi rachna uttam sangam hai,meri badhaiyan,
swagat aur abhinandan bhi/Utni door baith kar bhi samvedan ko jaan liya hai /
sachmuch babli,tumney apney bharat ko pahchaan liya hai/
mere blog par aaney ka hardik dhanyavaad
sader,
dr.bhoopendra
rewa
mp

मदन शर्मा said...

बेहद उम्दा शेर ... बधाइयाँ !

ZEAL said...

lovely lines !

Minakshi Pant said...

kya baat hai
nice :)

BK Chowla, said...

Besides th epoem, what I like is the shadow in the picture. It is so real

Bhushan said...

तन्हाई की आदत हो जाए तो भीड़ में भी अकेलापन आने लगता है. यह पंक्ति सुंदर बन पड़ी है-

करते हैं बसर रात में, मैं और मेरी तन्हाई !

Vivek Jain said...

सुंदर रचना
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

दिनेश शर्मा said...

बहुत खूब!लगे रहिए।

mahendra verma said...

तन्हाई कभी-कभी अच्छा साथी साबित होता है।
बढ़िया शायरी।

: केवल राम : said...

हाँ साथ है हमेशा मेरी तन्हाई और मेरा ..!

गिरधारी खंकरियाल said...

तन्हाई को नीरवता में आने दें !

smshindi By Sonu said...

very nice post

Kailash C Sharma said...

लाज़वाब प्रस्तुति..तन्हाई का अहसास अंतस को छू जाता है..

lokendra singh rajput said...

bahut hi badiya...

अमिता कौंडल said...

उर्मी जी बहुत सुंदर पंक्तियाँ हैं बधाई
सादर
अमिता कौंडल