Tuesday, May 24, 2011


ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,
एक उम्र से संभाला था हमने जो दरिया,
बहा ले गया वो उसे एक रात तूफानी बनके !

41 comments:

शिवम् मिश्रा said...

एक और बेहद उम्दा शेर ... लगे रहिये उर्मी जी ... एक के बाद एक ... जय हो !

Bhushan said...

पहली दोनों पंक्तियाँ बहुत ही सुंदर बन पड़ी हैं और याद रह जाती हैं-

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके

सुंदर शे'र

मदन शर्मा said...

सुन्दर पंक्तिया...उम्दा शेर ....
वाह वाह जी वाह वाह!!

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

बेहद बढ़िया .

सादर

Vivek Jain said...

बहुत ही बेहतरीन शेर
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

वाह क्या बात है ... बेहतरीन शेर !

डॉ टी एस दराल said...

वाह , बहुत सुन्दर लिखा है ।

अमित श्रीवास्तव said...

excellent..

kavita said...

Nice :)

Sunil Kumar said...

हमारे भी दिल से निकला वाह वाह .

वीना said...

बहुत खूब...

AlbelaKhatri.com said...

waah !

Rajesh Kumari said...

kya baat hai..vaah...thahar gaya tha koi vaqt ki nishaani ban ke.umda panktiyan.charcha manch ka aabhar jisne sheron ki dunia me pravesh karaya.bahut achche sher likhti hain aap.

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

वाह ..बहुत खूब ..

रश्मि प्रभा... said...

waah

रेखा श्रीवास्तव said...

bahut sundar sher, dil chhone ke poori gazal bhi nakaphi hoti hai aur jo utar hai dil men do laaine bhi bahut hain.

M VERMA said...

जज्बातों का तूफ़ान कुछ ऐसा ही होता है
सुन्दर पंक्तियाँ

आशु said...

"ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,"

वाह क्या गहरी सोच की बात की है आप ने इन चाँद लाइनों में..

बहुत खूब

आशु

Dr (Miss) Sharad Singh said...

एक उम्र से संभाला था हमने जो दरिया,
बहा ले गया वो उसे एक रात तूफानी बनके !


उम्दा शेर ...सुन्दर भावाभिव्यक्ति....

ghazalganga said...

बढ़िया कत्ता कहा है आपने....लाजवाब!
-----देवेंद्र गौतम

Abnish Singh Chauhan said...

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,
एक उम्र से संभाला था हमने जो दरिया,
बहा ले गया वो उसे एक रात तूफानी बनके !
bahut sundar kahan hai aapkee. badhai sweekaren

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,
वाह उर्मिल जी,
क्या कहने, बहुत खूबसूरत शेर है ! दिल को छू गया !

सदा said...

वाह ... बहुत खूब ।

anupama's sukrity ! said...

bahut hi sunder ..gahan bhaav ...
badhaii .

: केवल राम : said...

वाह ..वाह कह उठे हम भी

Patali-The-Village said...

वाह , बहुत सुन्दर लिखा है ।

SAJAN.AAWARA said...

MAM BAHUT SUNDAR PANKTIYAN LIKHI HAIN. . . . . . . .
FOLLOWER KA TIHRA SATAK MUBARAK HO.
JAI HIND JAI BHARAT

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन..

Rajendra Swarnkar : राजेन्द्र स्वर्णकार said...

उर्मि जी
सादर सस्नेह अभिवादन !

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके
वाह वाऽऽह ! क्या बात है …

मार्च के बाद की आपकी हर पोस्ट पढ़ी , तमाम रचनाओं के लिए बधाई और मुबारकबाद !

हार्दिक शुभकामनाओं सहित

- राजेन्द्र स्वर्णकार

mridula pradhan said...

bahut khoobsurat.....

ज्योति सिंह said...

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके,
एक उम्र से संभाला था हमने जो दरिया,
बहा ले गया वो उसे एक रात तूफानी बनके !
bahut khoobsurat rachna

chirag said...

bahut hi khoob likha aapne

nice blog
mere blog par bhi aaiyega aur pasand aaye to follow kariyega
http://iamhereonlyforu.blogspot.com/

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब .. क्या बात कही है ... लाजवाब ....

Kunwar Kusumesh said...

वाह, क्या बात है.

lokendra singh rajput said...

kya baat kahi hai.....

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

ठहर गया था कोई वक़्त की निशानी बनके,
वो भी बह गया आज आँखों का पानी बनके...
वाह बबली जी,
सच,
इन दो पंक्तियों में ही कितना कुछ कह दिया गया...
सुंदर मुक्तक, बधाई.

राकेश कौशिक said...

वाह वाह - अति सुंदर
आपके ब्लॉग पर पढ़ी गई शायरी में सर्वश्रेष्ठ - हार्दिक शुभकामनाएं

संतोष त्रिवेदी said...

सारा दर्द दो शेरों में उड़ेल दिया !
सुन्दर अनुभव !

पंकज मिश्रा said...

आपने भी लगता है यह कविता लिखी है किसी की दिवानी बनके।
बहुत सुंदर प्रस्तुति।

मैं इस ब्लॉग को फालो कर रहा हूं। अगर आप चाहें तो मेरा ब्लॉग फालो कर सकते हैं।

अमिता कौंडल said...

पहली बार आपको पढ़ रही हूँ उर्मी जी बहुत सुंदर शब्द हैं बधाई
सादर
अमिता कौंडल

Era Tak said...

good one...plzz visit my blog era's world...era13march.blogspot.com