Thursday, May 26, 2011


खोयी खोयी ये आँखें,
दिन में मदहोश तुम्हें करती है,
रात में, तन्हाई में,
हर रोज़ यह बरसती है !

47 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत भावप्रणव मुक्तक लिखा है आपने!

Rajesh Kumari said...

bahut khoob.very nice.

ana said...

बहुत बढ़िया

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' said...

वाह बबली जी, बहुत अच्छा लिखा है
माजिद देवबंदी का एक शेर याद आ गया, आपको भी अच्छा लगेगा-
तेरे पास आके हंसाऊंगा तुझे मैं लेकिन
जाते जाते तेरी पलकों को भिगो जाऊंगा.

Sunil Kumar said...

बहुत बढ़िया अच्छा है....

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

वाह!

पी.एस .भाकुनी said...

सुंदर पक्तियां..........

Bhushan said...

आँखों की दो भावों की छवियाँ एक साथ. बहुत सुंदर बन पड़ा है.

संजय भास्कर said...

बहुत बहुत बहुत बढ़िया

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

behad masoom!!

वन्दना said...

वाह ……………बहुत सुन्दर लिखा है

संतोष त्रिवेदी said...

मदहोश और होता है,बारिश दूसरा झेलता है !

chirag said...

bahut khoob likha aapane
and pic bhi aapane banaya ya fir kisi site se lia hain

kshama said...

Bahut,bahut sundar,Babli!

Kajal Kumar said...

:)

anupama's sukrity ! said...

bahut sunder

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

sundar lines.

राज भाटिय़ा said...

क्या बात हे...

डॉ टी एस दराल said...

आँखें भी दोहरी जिंदगी जीती हैं ! बहुत खूब ।

रचना दीक्षित said...

क्या बात हे बहुत अच्छा ....

hem pandey said...

भावनाओं से जुडी आँखों की यही विशेषता है |

अमिता कौंडल said...

चार पंक्तियों में कितनी सुन्दरता से भावों को पिरोया है आपने. बुत खूब
अमिता कौंडल

kavita said...

Intense and beautiful :)

सुमन'मीत' said...

waah kya baat hai....

BK Chowla, said...

Awesome.

Kunwar Kusumesh said...

तन्हाई और बरसात का वाक़ई बड़ा खूबसूरत साथ होता है.आपने इसे अपनी संक्षिप्त कविता में इसे बखूबी चित्रित भी किया है.मुझे किसी का एक बढ़िया सा शेर याद आ रहा है,आपको भी सुनाता हूँ:-
मज़ा बरसात का चाहो तो इन आँखों में आ जाओ.
वो बरसों में बरसती है ये बरसों से बरसती है.

गिरधारी खंकरियाल said...

प्रतीक्षारत आंखें पथरा जाने के बाद बरसनी शुरू हो जाती है

Suman said...

nice

Dr (Miss) Sharad Singh said...

हृदयस्पर्शी...भावपूर्ण पंक्तियां...
हार्दिक बधाई.

Maheshwari kaneri said...

आप की शायरी का अंदाज बहुत सुन्दर लगा ….सुन्दर भावपूर्ण शायरी… धन्यवाद

सुमन'मीत' said...

Babli ji
aap mere blog par aai shukriya..par tipani karne ke liye dhanyavaad mat kariyega...

मनोज भारती said...

आँखें ...मदहोशी...रातें...तन्हाई और इनका बरसना। बहुत खूब गागर में सागर भर दिया है बबली जी !!!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

खुबसूरत अहसास .

sheetal said...

hamari khoyi khoyi aankhen madhosh tumhe karti hain.
bheegti hain jo ye tanhai main,
saath ko tumhare tarasti hain.
jaanti hain ye, ki, aas na iski hogi puri,
fir bhi ye har pal, raah tumhari takti hain.

Urmi ji aapne sundar sher likha,
acchha laga padh ke.
kya baat hain aajkal tanhai ka jikr kuch jyaada hain.

mahendra verma said...

वाह, बहुत जानदार पंक्तियां।
आंखों की व्यथा को खूबसूरत शब्दों में ढाला है आपने।

anilbigopur said...

Dhoka diya tha jab tum ne mujhe,
Dil se main naraaz tha,
Phir socha ki dil se tumhe nikal dun,
Magar woh kambakth dil bhi tumhare paas tha.....

anilbigopur said...

Chand lamhon ki zindagani hai, nafraton se jiya nahi karte,
lagta hai dusamanon se guzarish karni padegi, dost to aab yaad kiya nahi karte

Sachin Malhotra said...

खूबसूरत !
मेरे ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है : Blind Devotion

सदा said...

वाह .. बहुत ही खूबसूरत शब्‍द रचना ।

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

बहुत ही भावनात्मक पंक्तियाँ ! कम शब्दों में आपने बहुत कुछ कह दिया ...

अभिषेक मिश्र said...

क्या बात है, बहुत ही सुन्दर.

महेन्द्र मिश्र said...

कम शब्दों में बेहतरीन मुक्तक ...

सहज साहित्य said...

आंखों का शब्दचित्र बहुत मोहक बना है ,वैसा ही चित्र भी है जो भावों की सही व्यंजना करता है ।

ZEAL said...

lovely lines babli ji

Dr. shyam gupta said...

मदहोश और होता है,बारिश दूसरा झेलता है !
--- बडी ना इन्साफ़ी है जी... जब मदहोश कर ही दिया तो फ़िर तनहाई कैसी....कोई एक ही मदहोश थोडे ही होता है....आग दोनों ओर बराबर लगती है मदहोशी में....अब दिन की मदहोशी इतनी भी बेगैरत नहीण कि रात तक खुमार उतर जाय....

Markand Dave said...

आदरणीय बहनश्री,

आपका भाव जगत सराहनीय है और शब्द का चयन भी सरल-मोहक और दिल को सीधा छूनेवाला है..!!

आपको बहुत बहुत बधाई है।

आपके ब्लॉग पर मैं अक्सर आता रहता हूँ और बहुत आनंद आता है।

धन्यवाद।

मार्कण्ड दवे।

http://mktvfilms.blogspot.com

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

shandar abhivyakti