Tuesday, June 28, 2011


आज फिर तेरी याद आ गयी बारिश को देखकर,
आँसूं भी ढल उठे हैं अपनी बेबसी को देखकर,
छम-छम बरस उठा मेरे नैनों से खारा जल,
बारिश भी सिहर उठी मेरी बारिश देखकर !

37 comments:

Dr Varsha Singh said...

बारिश पर खूबसूरत भावाभिव्यक्ति....

Bhushan said...

अतिश्योक्ति अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है.
बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर !
वाह.

यशवन्त माथुर (Yashwant Mathur) said...

वाह!

राकेश कौशिक said...

"बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर"

वाह

Sachin Malhotra said...

बहुत बढ़िया..
मेरी नयी पोस्ट पर आपका स्वागत है : Blind Devotion - सम्पूर्ण प्रेम...(Complete Love)

arvind said...

बारिश पर खूबसूरत भावाभिव्यक्ति....

kavita said...

Nice expression !

Kunwar Kusumesh said...

उफ़ ये बारिश.

Manish Kr. Khedawat said...

just a word "lazwaaabbbbbbbbb"

sheetal said...

bahut sundar likha aapne.

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है ।

Sumandebray said...

Very Nice

mahendra srivastava said...

वाह वाह..क्या बात है।

Sunil Kumar said...

बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर !
वाह..बहुत खूब....

Dr (Miss) Sharad Singh said...

रोयी इस कदर तेरी याद में...
के बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर !

शब्द-शब्द संवेदनाओं से भरी खूबसूरत रचना ....

डॉ टी एस दराल said...

नयापन लिए --सुन्दर प्रस्तुति ।

: केवल राम : said...

बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर !

वाह क्या कहने ...इस बारिश के ...!

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ...

nilesh mathur said...

वाह! क्या बात है, बहुत सुन्दर!

Udan Tashtari said...

बहुत बेहतरीन!!!

Harman said...

wah wah...awesome..lovely couplets

Indranil Bhattacharjee ........."सैल" said...

bahut sundar ...
I have been following Chhandik for quite sometime now .. thanks 1

अजय कुमार said...

बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर !

शानदार है

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

maza aa gaya aapki 4 lines padh kar..!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बारिश हे दोनों ही चित्र बहुत ही खूबसूरत.

Rakesh Kumar said...

आह! उसकी याद भी क्या हद कर रही है
नैनों की बरसात से ही बारिश को 'सिहरा'रही है.
काश! प्रियतम से सुखद मिलन हो
तो बारिश की 'सिहरन' भी खत्म हो.

अब कुछ आगे आप लिखियेगा बबली जी.
बस, बारिश को थमने न दीजियेगा.
नहीं तो सूखा पड़ जायेगा.

आप मेरे ब्लॉग पर आकर अपनी उदारता की बरसात करतीं हैं,तो मन भीग भीग जाता है.हृदय से आभारी हूँ आपका.

vidhya said...

bahuth aacha raha aap ke kavitha

dipak kumar said...

very nice post
chhotawriters.blogspot.com

RameshGhildiyal"Dhad" said...

is vay au versha ka rishta,
kya fir se ho paayega?......


tum jab se door gai ho raadhe
man-van-upvan sb vyakul hai..
tera rup salona lakhne ko ye pyasa darpan, nain bade hi vyaakul hain..
......
man-aangan bhigo jaati hain teri baaten..
roj sirhaane rahti hai gujri raaten...

रचना दीक्षित said...

"बारिश भी थम गयी मेरी बारिश देखकर"

बहुत खूब. बधाई.

मनोज भारती said...

बारिश भी सिहर उठी मेरी बारिश देखकर
.
.
.
सावन में प्रियतम की याद सहसा ही आ जाती है। लेकिन उसके विरह से हम बेबस हो जाते हैं और भावनाएँ आखों से आँसू बन झर पड़ती हैं...जो भावनाएँ हमारे प्रियतम तक पहुँचनी चाहिए थी वे आँसू बन छम-छम बरसती हैं...इस भावनाओं के अतिरेक को देख कर बारिश का सिहर जाना कोई अतिश्योक्ति नहीं...बल्कि मैं तो उठती हुई घटाओं से कहूँगा कि वे ऐसे प्रिय-प्रितम की भावनाओं को संप्रेषित कर उनकी विरह की ज्वाला को ठंडा करें।

बहुत सुंदर भावमयी अभिव्यक्ति ।

शिवम् मिश्रा said...

वाह बहुत खूब ... बढ़िया भाव है !

amrendra "amar" said...

खूबसूरत भावाभिव्यक्ति

upendra shukla said...

bahut accha

JHAROKHA said...

babli ji
shubhan allah----
kya khoob sher likhe hain barish par aur apne antarman ko bhibakhoobi prastut kiya hai.
badhai
poonam

Rajesh Kumari said...

ghajab ki lines.

unplanned plan said...

wonderful..