Friday, July 1, 2011


बहुत
चाहा पर उनको भुला सके,

ख्यालों में किसी और को ला सके,
उनको भुलाके आसूं तो पोंछ लिए,
पर किसी और को देखकर मुस्कुरा सके!

40 comments:

Dr Varsha Singh said...

बहुत सुन्दर...भावपूर्ण...

ज्ञानचंद मर्मज्ञ said...

आपके खूबसूरत अश आर दिल में उतर गए !
आभार !

kavita said...

Nice .Have a nice weekend Urmi.

Dr (Miss) Sharad Singh said...

मन को छूने वाला मुक्तक....बधाई.

vidhya said...

vah keya baath hai aapke batho may mare maan ko chu le aap ne

अजय कुमार said...

this is "true love"

mridula pradhan said...

choti si....pyari si.....

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है आपने इन पंक्तियों में ।

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

आपकी शायरी पढ़ ग़ालिब साहब का शेर याद आ गया

इश्क ने ग़ालिब निकम्मा कर दिया
वरना हम भी आदमी थे काम के

lokendra singh rajput said...

क्या बात कही है... बहुत खूब

Bhushan said...

बढ़िया कहा है.

sheetal said...

accha likha hain aapne.

Sunil Kumar said...

बहुत सुंदर क्या बात है, बधाई.....

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

यादें ऐसी ही होती हैं बबली!!

गिरधारी खंकरियाल said...

जब आंसू पोंछ ही दिए हो तो मुस्कराना भी सीख लेना चाहिए

Rajesh Kumari said...

wow..beautiful..bahut din baad aai hoon aapke blog par aapki shayeri dimaag refresh kar deti hain jo miss ki hain vo bhi dheere dheere padhoongi.

Harman said...

very nice...lovely couplets!

संतोष त्रिवेदी said...

ऐसी भी क्या चाहत है जो तनिक राहत न दे सके !

Rakesh Kumar said...

बबली जी ,कुछ विरोधाभास सा दिखलाई पड़ रहा है मुझे.
आपने बहुत चाहा उन्हें पर भुला न सकीं,
फिर उनको भुलाकर आँसूं भी पोछ डाले ?

चाहत का ही सब खेल है.सच्ची चाहत प्रियतम से अवश्य मिला देती है.
एक और सुन्दर सा फूल लगा दिया है आपने 'गुलदस्ता-ऐ-शायरी' में.
बहुत बहुत आभार.

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

अच्छा मुक्तक है!
बधाई!

Vivek Jain said...

वाह, वाह, वाह,
बधाई,
विवेक जैन vivj2000.blogspot.com

CS Devendra K Sharma "Man without Brain" said...

good one........

Sawai SIingh Rajpurohit said...

very nice post.

sajjan singh said...

बहुत ही रुमानी शायरी है ।

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

amazing shaayri.....

Sapna Nigam ( mitanigoth.blogspot.com ) said...

हृद्य स्पर्शी मुक्तक.

upendra shukla said...

really bahut acchi dil ko chune wali rachna

Kunwar Kusumesh said...

बहुत सुन्दर लिखा है.

राकेश कौशिक said...

बहुत अच्छे

दिगम्बर नासवा said...

वाह ... बहुत कमाल की नज़्म है ... कुआ बात है ..

श्याम सखा 'श्याम' said...

khoobsoorat parstuti

Kailash C Sharma said...

बहुत खूब! एक मुक्तक में ज़िंदगी का यथार्थ प्रस्तुत कर दिया..

shama said...

Kya khoob likhtee ho!

knkayastha said...

उम्दा... यही तो विडम्बना है... जिंदगी रुक सी जाती है...

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

वाह..........वाह...........वाह

यही तो सच्चा प्यार है .......गज़ब का मुक्तक

mahendra verma said...

उनको भुलाके आसूं तो पोंछ लिए,
पर किसी और को देखकर मुस्कुरा न सके!

आपकी शायरी में बड़े गहरे भाव छिपे होते हैं।

डॉ. हरदीप संधु said...

सुन्दर .... खूब कहा है !

Dr. shyam gupta said...

yes..true...

"There will be no more romances to me
It's foolish to start;
B'cause my love...
The memoirs of beautiful love of yours,
Is still in my heart...
is still in my heart"

Richa said...

badiya..

nivedita said...

you have taken my feelings and put in here. heart touching..