Tuesday, July 26, 2011


चिरागों से अँधेरे दूर हो जाते,
तो चाँद की चाहत हमें कभी होती,
अगर कट सकती यह ज़िन्दगी अकेले,
तो हमें आपकी भी ज़रुरत होती !

47 comments:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

वाह, बहुत खूब!
इस शेर में तो आपने दिली हकीकत ही कह डाली!

संजय भास्कर said...

बहुत लाजवाब शेर ...

संजय भास्कर said...

अगर कट सकती यह ज़िन्दगी अकेले,
तो हमें आपकी भी ज़रुरत न होती !
.............वाह बेहतरीन !!!!

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

Rakesh Kumar said...

वाह! बबली जी.
चाँद और चिराग
हम और आप

चाँद से अँधेरे दूर करने की चाहत
और उनसे अकेलापन दूर करने की चाहत.
सब चाहत का ही खेल है.

सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति.

राकेश कौशिक said...

क्या बात है - बहुत खूब

Bhushan said...

खूब कहा है.

smshindi By Sonu said...

बहुत सुन्दर भावपूर्ण प्रस्तुति!

डॉ टी एस दराल said...

एक दम सच कहा ।

SAJAN.AAWARA said...

MAM DUS NUMBRI UPASTHIT HAI...
BEHTREEN SHER
JAI HIND JAI BHARAT

Rajesh Kumari said...

vaah kya baat hai.

kshama said...

Sach kahtee ho!

vidhya said...

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

ताऊ रामपुरिया said...

लाजवाब.

रामराम

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

ज़रूरत के लिए!! सिर्फ ज़रूरत के लिए!!

प्रेम सरोवर said...

आपने बहुत ही काबिले तारीफ शेर अर्ज किया है।इसमें किसी भी सहृदय मनुष्य की संवेदनशील भावनाओं को झकझोर देने का सामर्थ्य है। बहुत सुंदर। धन्यवाद।

mridula pradhan said...

bahot pyara.....likha hai.

शिवम् मिश्रा said...

वाह, बहुत खूब!

Harman said...

SAhi....
lovely worlds!

Udan Tashtari said...

क्या बात है..कहाँ कट पाती है अकेले....

नीरज गोस्वामी said...

वाह...लाजवाब...
नीरज

shama said...

Bahut khoob,Babli!

Dr (Miss) Sharad Singh said...

अगर कट सकती यह ज़िन्दगी अकेले,
तो हमें आपकी भी ज़रुरत न होती !

लाजवाब अभिव्यक्ति ...

anu said...

दिल की अभिव्यक्ति को
चंद शब्दों में वयां कर दिया
बहुत खूब

Bikramjit said...

beautifulllllll

story of my life it seems ..


Bikram's

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ (Zakir Ali 'Rajnish') said...

बहुत ही प्‍यारा कता है। बधाई।

............
प्रेम एक दलदल है..
’चोंच में आकाश’ समा लेने की जिद।

Ravi Rajbhar said...

Bahut khoob...
sach ke ash-pas hi ye sher.

hamare yaha bhi aaiye... apka swagat hi.

chirag said...

kya bat hain
chalo hamara bhi naam aaya aapaki
shayari mein

knkayastha said...

अगर कट सकती यह ज़िन्दगी अकेले...

आह...आह...आह
वाह!!!

sm said...

बहुत लाजवाब शेर

veerubhai said...

हर कोई चाहता है एक मुठ्ठी आसमान .प्रेम के अभाव में आदमी अ-प्रयोज्य (वेस्तिजियल )अंग हो जाता है .प्रेम बिना जग सूना -तुम बिन जाऊं कहाँ ?
यूं बया अपने घौसले में जुगनुओं से भी काम चलाती है .यूं बच्चा भी अपनी माँ से कहता है मैया मई तो चन्द्र खिलौना लेहिं.हर कोई चाहता उसके जीवन में आके कोई उजास भरे .सहज मन की बिंदास अभिव्यक्ति .

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

सही लिखा है ... बहुत खूब

BK Chowla, said...

As always, its just so well written

सदा said...

वाह ...बहुत खूब कहा है ... बधाई ।

๑♥!!अक्षय-मन!!♥๑, said...

कितना सही लिखा है सुन्दरता के साथ बहुत सुन्दर बहुत अच्छा
तो हमें आपकी जरुरत ना होती....सुपर लाइक

"अक्षय-मन !!कुछ मुक्तक कुछ क्षणिकाएं!! से"

Kunwar Kusumesh said...

बहुत खूब .

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

aapki char laino ka jabab nahi hota..bahut shandar

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " said...

वाह ...गज़ब का मुक्तक

veerubhai said...

बधाई अच्छे लेखन के लिए .ब्लॉग पर दस्तक के लिए भी .

veerubhai said...

बधाई अच्छे लेखन के लिए .ब्लॉग पर दस्तक के लिए भी .

अशोक बजाज said...

बधाई !

lokendra singh rajput said...

जिंदगी तनहा नहीं कटती ये सच है... बखूबी कहा अपने...

kavita said...

Beautiful :)

sheetal said...

sach hain wakai main jindagi akele nahi katti.
accha sher hain.

सहज साहित्य said...

जीवन में सबकी ज़रूरत अपरिहार्य है , चाँद की भी और मन की बात समझने वाले की भी । उम्दा पेशकश !

Dr Varsha Singh said...

भावपूर्ण प्रस्तुति!

Dinesh pareek said...

अति सुन्दर मन मोहित होगया आप के ब्लॉग पे आने से इस केलिए आप को बहुत बहुत धन्यवाद्
आप मेरे ब्लॉग पे भी अपना कीमती समय निकाल के आवे