Thursday, November 24, 2011


तुझे अपना मुकद्दर बनायेंगे हम,
तेरे संग हर लम्हा बितायेंगे हम,
ज़िन्दगी भले ही रूठे तू रूठ जाना,
तेरे बिन जी पायेंगे हम !

39 comments:

दिगम्बर नासवा said...

Jisko jindagi samajh liya use bina jeena mushkil hi hota hai ... Lajawab sher hai ...

सदा said...

वाह ...बहुत खूब।

शिवम् मिश्रा said...

बेहद उम्दा शेर ... जय हो !

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

nice wording
I have added 2 lines to this,not to offend u justcould not stop myself
toon mil jo jaaye to khushkismat kahlaayenge

AlbelaKhatri.com said...

waah waah ............vahi rang..vahi andaaz....kya baat hai !!!!

na aap badle, na hi aapki shaayri........

you are zindabaad !

केवल राम : said...

बेहद शानदार .....!

Rahul Bhatia said...

बहुत खूब! Very nice..

वन्दना said...

बडी शिद्दत से दिल की बात कही है………बहुत सुन्दर्।

mridula pradhan said...

bahot achchi.......

dheerendra said...

बहुत खूब लिखा आपने
जिंदगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना,
तेरे बिन हम नहीं जी पायेगे हम|बधाई ...
नई पोस्ट में स्वागत है

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

इस उत्कृष्ट प्रविष्टी की चर्चा कल शनिवार के चर्चा मंच पर भी की जा रही है!
यदि किसी रचनाधर्मी की पोस्ट या उसके लिंक की चर्चा कहीं पर की जा रही होती है, तो उस पत्रिका के व्यवस्थापक का यह कर्तव्य होता है कि वो उसको इस बारे में सूचित कर दे। आपको यह सूचना केवल इसी उद्देश्य से दी जा रही है! अधिक से अधिक लोग आपके ब्लॉग पर पहुँचेंगे तो चर्चा मंच का भी प्रयास सफल होगा।

नीरज गोस्वामी said...

Waah Babli Ji waah...

Neeraj

डॉ टी एस दराल said...

खूबसूरत तस्वीर से मैच करते सुन्दर उदगार .

kshama said...

Bahut,bahut sundar!

anju(anu) choudhary said...

umdaa......bahut khub

अभिषेक प्रसाद 'अवि' said...

adhura satya... kisi k bina jindagi nahi rukti... waise panktiyaan khubsurat hai...

Bhushan said...

प्रेम की भावना की सुंदर अभिव्यक्ति.

kase kahun?by kavita verma said...

beautiful...

Harman said...

Wow!
love it!!! too good!

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') said...

क्या बात है... वाह!
सादर...

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

शानदार, जानदार. क्या बात है....

Kailash C Sharma said...

बहुत खूब!

Manav Mehta said...

चंद शब्द और गहरे अहसास ...

veerubhai said...

तुझे हर लम्हा चाहेंगे हम ,मुकद्दर अपना आजमाएंगे हम .सुन्दर प्रस्तुति .

chirag said...

bahut khoob

sm said...

ज़िन्दगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना
बहुत खूब

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

beautiful lines.....!!!

prerna argal said...

आपकी पोस्ट आज की ब्लोगर्स मीट वीकली के मंच पर प्रस्तुत की गई है /आप आइये और अपने अनमोल संदेशों के द्वारा हमारा उत्साह बढाइये/आप हिंदी की सेवा इसी तरह अपने मेहनत और लगन से लिखी गई रचनाओं द्वारा करते रहें यही कामना है /आभार /लिंक नीचे दिया गया है /
http://hbfint.blogspot.com/2011/11/19-happy-islamic-new-year.html

सहज साहित्य said...

बहुत प्यारी बात कह दी है उर्मि जी -
ज़िन्दगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना,
तेरे बिन न जी पायेंगे हम !
-प्रिय का रूठना ही सबसे दुखद होता है

NISHA MAHARANA said...

बहुत खूब।

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" said...

tabiyat nasaj thi..kaphi dino tak aapki behtarin shayriyon ka lutf nahi utha paaya..behtain dil ko choo lene wali panktiyan..baise char panktiyon me bhavon ko dilkash andaj me pesh karne me to aapne maharat hasil kar lee hai..sadar badhayee aaur amantran ke sath

Rajput said...

सुंदर अभिव्यक्ति !बहुत खूब

mahendra verma said...

ज़िन्दगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना,
तेरे बिन न जी पायेंगे हम।

बेहतरीन पंक्तियां।

रजनी मल्होत्रा नैय्यर said...

जो सुनेगा दास्ताँ मेरे दिल-ए-बर्बादी की,
हर चेहरा हो जायेगा गुमसुम, हर आँखें नम होगी,
तुझ बिन जीने की सजा क्या मौत से कम होगी .

G.N.SHAW said...

babali जी पहली दफा aya , अच्छा लगा

veerubhai said...

तुझे अपना मुकद्दर बनायेंगे हम,
तेरे संग हर लम्हा बितायेंगे हम,
ज़िन्दगी भले ही रूठे तू न रूठ जाना,
तेरे बिन न जी पायेंगे हम !
खूबसूरत हैं अश आर आपके .

Mamta Bajpai said...

वाह ..आहूत खूब

चला बिहारी ब्लॉगर बनने said...

कम शब्दों में गहरी अभिव्यक्ति!!

संतोष कुमार said...

वाह ...बहुत खूब।