Tuesday, November 29, 2011


तेरे इंतज़ार में ये नज़रें झुकी है,
तेरे चेहरे की झलक देखने की आस है,
जानूँ तेरा नाम, तेरा पता,
पर दिल में अनजानी सी बेचैनी जगी है !

33 comments:

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत खूब ..

घनश्याम मौर्य said...

बेहतरीन। इसे पढ़कर अपनी नयी गजल का एक शेर अर्ज कर रहा हूँ, 'वो इस शहर में नये आये हैं रहने के लिये, कैसे भी करके जरा उनका पता दो यारों।'

Kailash C Sharma said...

बहुत सुंदर...

सदा said...

वाह ...बहुत ही बढि़या।

Deepak Shukla said...

Namaskar ji...

Tera naam pata na jaanu...
Tujhko na hi dekha hai...
Mera tan man fir bhi tere...
Naam ke sang hi dhadka hai...

Sundar bhav..

Deepak Shukla..

अनुपमा त्रिपाठी... said...

bahut sunder ...

R.Ramakrishnan said...

Lovely language of love. Really sublime poem!

डॉ टी एस दराल said...

अन्जाने प्यार का सुन्दर इंतजार ।

sheetal said...

na dekha hain tujhko kabhi,
na jaana kabhi tera naam pata,
ye kaisi anjaani kashish hain,
jisne baichan kiya hain mujhe is
tarah.
accha likha hain aapne.

dheerendra said...

बबली जी,..
बहुत खूब..लिखा आपने..बेहतरीन पोस्ट,..

हम नजरों से दूर,आँखों से नही
हम ख्वाबो से दूर,ख्यालों से नहीं
हम दिल से दूर, धड़कन से नही
हम आपसे दूर,आपकी यादों से नहीं...

kshama said...

Behad sundar rachana....hamesha kee tarah!

Rakesh Kumar said...

ये दिल भी क्या क्या गजब ढहा देता है जी.
नाम पता न होने से बेचैनी का होना तो
लाजमी ही है.

बहुत ही सुन्दर शायरी है आपकी.

मेरे ब्लॉग पर आकर आपने सुन्दर टिपण्णी की,
इसके लिए आभार आपका.
समय मिले तो हनुमान जी पर अपने और
भी विचार और अनुभव प्रस्तुत कीजियेगा.

sushma 'आहुति' said...

सुन्दर चित्र के साथ खुबसूरत रचना....

Harman said...

very nice..
keep up the good work!
generally you shiyari..is very simple yet close to emotions and reality!

Bhushan said...

किसी 'अंजान' की प्रतीक्षा का सुंदर चित्रण. भावपूर्ण पंक्तियाँ.

सुरेन्द्र "मुल्हिद" said...

atyant sundar

संतोष कुमार said...

Waah kya baat hai bahut sunder.

Ajnabi tum jane pehchane se lagte ho..

शिवम् मिश्रा said...

बहुत खूब ..

ASHOK BIRLA said...

sundar rachna

lokendra singh rajput said...

भाई क्या कहें इस शेर के बारे में.. बस कोई याद आ गया

अरूण साथी said...

अतिसुन्दर

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

बहुत बढ़िया मुक्तक लिखा है आपने!

अरुण कुमार निगम (mitanigoth2.blogspot.com) said...

बहुत खूब

सुरेश शर्मा . कार्टूनिस्ट said...

आपसे निवेदन है इस पोस्ट पर आकर
अपनी राय अवश्य दें -
http://cartoondhamaka.blogspot.com/2011/12/blog-post_420.html#links

Rahul Bhatia said...

खुबसूरत रचना

Kunwar Kusumesh said...

बहुत ही बढि़या.

Rajeev Panchhi said...

Bahut khoob!

Rajeev Panchhi said...

Bahut khoob!

काजल कुमार Kajal Kumar said...

वाह जी बल्ले बल्ले

mahendra verma said...

खूबसूरत पंक्तियां, खूबसूरत भाव।

डा.राजेंद्र तेला"निरंतर" Dr.Rajendra Tela,Nirantar" said...

intzaar hai ,thaa ,rahegaa,
jinkaa hotaa hai kabhee
khatm nahee hotaa

दिगम्बर नासवा said...

बहुत खूब ... बस देखने की आस ही है जो बैचेनी जगा देती है ... उम्दा शेर है ..

shama said...

Bahut,bahut khoobsoorat!